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OCN Research Desk · भारतीय संसदीय लोकतंत्र

भारत का नौवाँ लोकसभा चुनाव 1989 : राजीव गांधी की सत्ता से विदाई, वी. पी. सिंह का उभार और भाजपा का विस्तार

राज्यवार सीटें, दलवार नतीजे और मत प्रतिशत, प्रमुख नेता तथा चुनावी घटनाक्रम

ओमकार चौधरी / OCN Research Deskस्वतंत्र शोध अध्याय · 27 अक्टूबर 2026
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भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — नौवाँ अध्याय

भारत का नौवाँ लोकसभा आम चुनाव 22 और 26 नवंबर 1989 को हुआ। यह चुनाव स्वतंत्र भारत की राजनीति में एक बड़े परिवर्तन का प्रतीक बना। दिसंबर 1984 में 400 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता में आए राजीव गांधी को पाँच वर्ष बाद लोकसभा में बहुमत नहीं मिला। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी, लेकिन उसकी सीटें घटकर 197 रह गईं।

वी. पी. सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल ने 143 सीटें जीतीं। भारतीय जनता पार्टी ने 1984 की दो सीटों से बढ़कर 85 सीटें हासिल कीं, जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को 33 सीटें मिलीं।

कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया। जनता दल के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार बनी, जिसे भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों ने बाहर से समर्थन दिया। 2 दिसंबर 1989 को विश्वनाथ प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

इस चुनाव के प्रमुख मुद्दों में बोफोर्स तोप सौदे पर भ्रष्टाचार के आरोप, राजीव गांधी सरकार के विरुद्ध वी. पी. सिंह का अभियान, शाहबानो प्रकरण, अयोध्या विवाद और विपक्षी दलों की एकजुटता शामिल थे।

चुनाव-संपन्न लोकसभा सीटें
529
कांग्रेस की सीटें
197
जनता दल की सीटें
143
भाजपा की सीटें
85

1. नौवें लोकसभा चुनाव के महत्वपूर्ण आँकड़े

विषयविवरण
चुनाव की मुख्य तारीखें22 और 26 नवंबर 1989
लोकसभानौवीं
कुल निर्धारित लोकसभा सीटें543
जिन सीटों पर चुनाव संपन्न हुआ529
असम में मतदान नहीं हुआ14 सीटें
सामान्य निर्वाचन क्षेत्र412
अनुसूचित जाति आरक्षित सीटें78
अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटें39
पंजीकृत मतदाता49,89,06,129
मतदान करने वाले30,90,50,495
मतदान प्रतिशत61.95%
कुल उम्मीदवार6,160
राष्ट्रीय राजनीतिक दल8
राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दल20
अन्य पंजीकृत दल85
निर्दलीय प्रत्याशी3,713
कांग्रेस की सीटें197
जनता दल की सीटें143
भाजपा की सीटें85
सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्रीवी. पी. सिंह
नौवीं लोकसभा का गठन2 दिसंबर 1989

इस चुनाव के सभी आँकड़े भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार हैं। विशेष रूप से 543 निर्धारित सीटों और 529 चुनाव-संपन्न सीटों का अंतर महत्वपूर्ण है। असम में राजनीतिक परिस्थितियों के कारण 14 सीटों पर 1989 में मतदान नहीं हुआ।

2. किस पार्टी को कितनी सीटें और कितना वोट शेयर मिला?

1989 के चुनाव परिणामों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि जनता दल दूसरी और भाजपा तीसरी सबसे बड़ी पार्टी थी।

निर्वाचन आयोग की मूल राष्ट्रीय परिणाम तालिका में प्रमुख दलों का प्रदर्शन इस प्रकार दर्ज है।

राजनीतिक दललोकसभा सीटेंराष्ट्रीय वोट शेयर
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस19739.53%
जनता दल14317.79%
भारतीय जनता पार्टी8511.36%
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी336.55%
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी122.57%
अन्नाद्रमुक111.50%
शिरोमणि अकाली दल (मान)60.77%
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी40.62%
बहुजन समाज पार्टी32.07%
ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक30.42%
झारखंड मुक्ति मोर्चा3लगभग 0.34%
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस30.02%
तेलुगु देशम पार्टी23.29%
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग20.32%
इंडियन कांग्रेस (सोशलिस्ट)10.33%
इंडियन पीपुल्स फ्रंट1लगभग 0.25%
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन1लगभग 0.21%
गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट1लगभग 0.14%
केरल कांग्रेस (एम)1लगभग 0.12%
शिवसेना10.11%
हिंदू महासभा1लगभग 0.07%
मार्क्सिस्ट कोऑर्डिनेशन1लगभग 0.10%
महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी10.04%
सिक्किम संग्राम परिषद10.03%
निर्दलीय उम्मीदवार125.25%

राष्ट्रीय वोट शेयर का आधार 30,07,76,423 वैध मत हैं। छोटे दलों के कुछ प्रतिशत पूर्णांकित अनुमान के रूप में चिह्नित हैं। शून्य सीट जीतने वाले दलों को तालिका में नहीं दिखाया गया है। मूल स्रोत: निर्वाचन आयोग, 1989 सांख्यिकीय रिपोर्ट, पृष्ठ 94–100।

इन परिणामों के चार उल्लेखनीय तथ्य

पहला, कांग्रेस को लगभग 40 प्रतिशत वोट मिले, जो जनता दल के 17.79 प्रतिशत से दोगुने से भी अधिक थे। इसके बावजूद वह लोकसभा में बहुमत से काफी पीछे रह गई।

दूसरा, जनता दल ने 244 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 143 सीटें जीतीं। राष्ट्रीय मोर्चे के अंतर्गत विभिन्न दलों के बीच चुनावी तालमेल हुआ था।

तीसरा, भाजपा ने 225 सीटों पर चुनाव लड़ा और 85 सीटें जीतीं। पाँच वर्षों में उसकी संसदीय संख्या दो से बढ़कर 85 हो गई।

चौथा, क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा परिवर्तन हुआ। 1984 में तेलुगु देशम के 30 सांसद थे, लेकिन 1989 में केवल दो रह गए। इसके विपरीत अन्नाद्रमुक ने 11 सीटें जीतीं।

3. राज्यवार लोकसभा सीटें और कांग्रेस, जनता दल तथा भाजपा का प्रदर्शन

1989 में भारत के राजनीतिक मानचित्र के अनुसार 31 राज्य एवं केंद्रशासित चुनावी इकाइयों में मतदान हुआ। असम की 14 सीटों पर चुनाव नहीं हो सका।

नीचे भारत निर्वाचन आयोग की मूल रिपोर्ट के पृष्ठ 90–93 के आधार पर राज्यवार परिणाम हैं।

राज्य / केंद्रशासित प्रदेशसीटेंकांग्रेसजनता दलभाजपा
उत्तर प्रदेश8515548
बिहार544328
महाराष्ट्र4828510
आंध्र प्रदेश423900
पश्चिम बंगाल42400
मध्य प्रदेश408427
तमिलनाडु392700
कर्नाटक282710
गुजरात2631112
राजस्थान2501113
ओडिशा213160
केरल201400
पंजाब13210
हरियाणा10460
दिल्ली7214
जम्मू-कश्मीर6200
हिमाचल प्रदेश4103
अरुणाचल प्रदेश2200
गोवा2100
मणिपुर2200
मेघालय2200
त्रिपुरा2200
मिजोरम1100
नगालैंड1100
सिक्किम1000
अंडमान-निकोबार1100
चंडीगढ़1010
दादरा-नगर हवेली1000
दमन और दीव1000
लक्षद्वीप1100
पांडिचेरी1100
कुल52919714385

यहाँ ‘अन्य दलों’ की सीटें तालिका को संक्षिप्त रखने के लिए अलग स्तंभ में नहीं दिखाई गई हैं। माकपा, भाकपा, अन्नाद्रमुक, अकाली दल, बसपा और अन्य दलों की सीटों को कांग्रेस, जनता दल अथवा भाजपा में नहीं जोड़ा गया है।

4. प्रमुख राज्यों में सभी महत्वपूर्ण दलों के परिणाम

राज्यदलवार परिणाम
उत्तर प्रदेशजनता दल 54, कांग्रेस 15, भाजपा 8, बसपा 2, भाकपा 2, माकपा 1, हिंदू महासभा 1, निर्दलीय 2
बिहारजनता दल 32, भाजपा 8, कांग्रेस 4, भाकपा 4, झामुमो 3, माकपा 1, इंडियन पीपुल्स फ्रंट 1, मार्क्सिस्ट कोऑर्डिनेशन 1
महाराष्ट्रकांग्रेस 28, भाजपा 10, जनता दल 5, निर्दलीय 3, भाकपा 1, शिवसेना 1
आंध्र प्रदेशकांग्रेस 39, तेलुगु देशम 2, एमआईएम 1
पश्चिम बंगालमाकपा 27, कांग्रेस 4, आरएसपी 4, भाकपा 3, फॉरवर्ड ब्लॉक 3, गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट 1
मध्य प्रदेशभाजपा 27, कांग्रेस 8, जनता दल 4, निर्दलीय 1
तमिलनाडुकांग्रेस 27, अन्नाद्रमुक 11, भाकपा 1
गुजरातभाजपा 12, जनता दल 11, कांग्रेस 3
राजस्थानभाजपा 13, जनता दल 11, माकपा 1
ओडिशाजनता दल 16, कांग्रेस 3, भाकपा 1, माकपा 1
कर्नाटककांग्रेस 27, जनता दल 1
केरलकांग्रेस 14, माकपा 2, मुस्लिम लीग 2, केरल कांग्रेस (एम) 1, इंडियन कांग्रेस (सोशलिस्ट) 1
पंजाबअकाली दल (मान) 6, निर्दलीय 3, कांग्रेस 2, जनता दल 1, बसपा 1
हरियाणाजनता दल 6, कांग्रेस 4
दिल्लीभाजपा 4, कांग्रेस 2, जनता दल 1
जम्मू-कश्मीरनेशनल कॉन्फ्रेंस 3, कांग्रेस 2, निर्दलीय 1
हिमाचल प्रदेशभाजपा 3, कांग्रेस 1

पाँच राज्यों के परिणाम विशेष रूप से उल्लेखनीय

उत्तर प्रदेश और बिहार में जनता दल प्रमुख शक्ति बनकर उभरा। वहीं मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में भाजपा ने बड़ी सफलता हासिल की। दक्षिण भारत में कांग्रेस की स्थिति काफी अलग रही—आंध्र प्रदेश में 39, तमिलनाडु में 27 और कर्नाटक में 27 सीटें कांग्रेस के खाते में गईं।

5. चुनाव मैदान में कौन-कौन से दल थे और उनके नेता कौन थे?

1989 में आठ राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त दल चुनाव मैदान में थे। इनके अलावा क्षेत्रीय एवं पंजीकृत छोटे दल भी थे।

राजनीतिक दलप्रमुख नेता
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसराजीव गांधी
जनता दलवी. पी. सिंह, चंद्रशेखर, देवीलाल, अजित सिंह
भारतीय जनता पार्टीलालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टीई. एम. एस. नंबूदरीपाद, ज्योति बसु, हरकिशन सिंह सुरजीत
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टीसी. राजेश्वर राव, इंद्रजीत गुप्त
इंडियन कांग्रेस (सोशलिस्ट)शरत चंद्र सिन्हा
जनता पार्टी (जेपी)सुब्रह्मण्यम स्वामी सहित तत्कालीन नेतृत्व
लोकदल (बहुगुणा)हेमवती नंदन बहुगुणा
तेलुगु देशम पार्टीएन. टी. रामाराव
अन्नाद्रमुकजे. जयललिता
डीएमकेएम. करुणानिधि
बहुजन समाज पार्टीकांशीराम, मायावती
शिरोमणि अकाली दल (मान)सिमरनजीत सिंह मान
शिवसेनाबाल ठाकरे
झारखंड मुक्ति मोर्चाशिबू सोरेन
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंसफारूक अब्दुल्ला
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीगइब्राहिम सुलेमान सैत
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीनसुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टीत्रिदीब चौधरी
फॉरवर्ड ब्लॉकचित्त बसु
गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंटसुभाष घीसिंग
सिक्किम संग्राम परिषदनर बहादुर भंडारी

सूची में संगठनात्मक अध्यक्षों के अलावा संबंधित दलों के प्रमुख वैचारिक और चुनावी नेता भी शामिल हैं।

6. नौवें लोकसभा चुनाव की प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ

वी. पी. सिंह का राष्ट्रीय राजनीति में उभार

वी. पी. सिंह राजीव गांधी सरकार में वित्त और रक्षा मंत्री रह चुके थे। सरकार से अलग होने के बाद उन्होंने जनमोर्चा तथा आगे चलकर जनता दल के माध्यम से विपक्षी राजनीति को एक नया नेतृत्व दिया।

1988 में जनता दल का गठन हुआ। इस दल ने राष्ट्रीय मोर्चे के अंतर्गत चुनाव लड़ा और 143 सीटें हासिल कीं।

राजीव गांधी और बोफोर्स विवाद

अप्रैल 1987 में स्वीडन से खरीदी गई बोफोर्स तोपों के सौदे में कथित कमीशन और रिश्वत के आरोप सार्वजनिक हुए। वी. पी. सिंह ने इस प्रकरण को चुनावी अभियान का प्रमुख विषय बनाया।

कांग्रेस ने आरोपों का विरोध किया। फिर भी बोफोर्स प्रकरण 1989 की चुनावी बहस में प्रमुखता से उपस्थित रहा। भ्रष्टाचार के आरोपों और बाद की न्यायिक परिणतियों को अलग-अलग समझना चाहिए।

भाजपा का दो से 85 सीटों तक पहुँचना

1984 में केवल दो लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा 1989 में 85 सीटें जीत गई। उसका राष्ट्रीय वोट प्रतिशत 11.36 तक पहुँचा।

लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा ने संगठनात्मक विस्तार किया। अयोध्या का रामजन्मभूमि प्रश्न भी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में प्रमुख होता गया। 1990 की राम रथयात्रा अभी नहीं हुई थी; वह 1989 के चुनाव के बाद की घटना है।

तेलुगु देशम की सीटों में बड़ी गिरावट

एन. टी. रामाराव राष्ट्रीय मोर्चे की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। लेकिन आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम की लोकसभा सीटें 1984 की 30 से घटकर 1989 में केवल दो रह गईं।

इसी समय हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी तेलुगु देशम को पराजय मिली और कांग्रेस ने राज्य में सरकार बनाई।

बहुजन समाज पार्टी का पहली बार लोकसभा में प्रवेश

कांशीराम द्वारा 1984 में स्थापित बहुजन समाज पार्टी ने 1989 में तीन लोकसभा सीटें जीतीं—दो उत्तर प्रदेश में और एक पंजाब में।

यह आगे चलकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा के विस्तार का महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण बना।

7. सबसे चर्चित निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम

निर्वाचन क्षेत्रविजेतापार्टी
अमेठी, उत्तर प्रदेशराजीव गांधीकांग्रेस
फतेहपुर, उत्तर प्रदेशविश्वनाथ प्रताप सिंहजनता दल
रोहतक, हरियाणाचौधरी देवीलालजनता दल
बलिया, उत्तर प्रदेशचंद्रशेखरजनता दल
बागपत, उत्तर प्रदेशअजित सिंहजनता दल
नई दिल्लीलालकृष्ण आडवाणीभाजपा
इलाहाबादजनेश्वर मिश्रजनता दल
फैजाबादमित्रसेन यादवभाकपा
गोरखपुरअवैद्यनाथहिंदू महासभा
आजमगढ़रामकृष्ण यादवबसपा
हैदराबादसुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसीएमआईएम

देवीलाल की रोहतक से जीत

रोहतक लोकसभा क्षेत्र — 1989

उम्मीदवारप्राप्त मत
देवीलाल — जनता दल3,90,243
हरद्वारी लाल — कांग्रेस2,01,238

जीत का अंतर

1,89,005 वोट

निर्वाचन आयोग का रोहतक निर्वाचन क्षेत्र विवरण।

8. राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार कैसे बनी?

1989 में किसी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन उसके पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त समर्थन नहीं था।

जनता दल ने अन्य सहयोगी दलों के साथ राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार बनाई। भाजपा तथा वाम दल सरकार में शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने बाहर से समर्थन दिया।

2 दिसंबर 1989 को वी. पी. सिंह प्रधानमंत्री बने। चौधरी देवीलाल उपप्रधानमंत्री बने। सरकार को समर्थन देने वाले दलों के बीच नीतिगत मतभेद आगे चलकर गंभीर रूप लेने लगे।

1989 से 1990 की महत्वपूर्ण राजनीतिक समयरेखा

1. 1988 — जनता दल और राष्ट्रीय मोर्चे का गठन

विपक्षी दलों ने राजीव गांधी सरकार के खिलाफ चुनावी एकजुटता का प्रयास किया। 2. नवंबर 1989 — नौवें लोकसभा चुनाव

कांग्रेस बहुमत से दूर रही। जनता दल, भाजपा और वाम दलों ने उल्लेखनीय सीटें जीतीं। 3. 2 दिसंबर 1989 — वी. पी. सिंह प्रधानमंत्री बने

राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार ने कार्यभार संभाला। 4. 7 अगस्त 1990 — मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने की घोषणा

केंद्र सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए केंद्रीय सेवाओं में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का निर्णय घोषित किया। 5. 25 सितंबर 1990 — लालकृष्ण आडवाणी की राम रथयात्रा शुरू

सोमनाथ से अयोध्या के लिए यात्रा आरंभ हुई। 23 अक्टूबर 1990 को बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी हुई। 6. नवंबर 1990 — भाजपा ने समर्थन वापस लिया

वी. पी. सिंह सरकार विश्वास मत हार गई। 7. 10 नवंबर 1990 — चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने

कांग्रेस के बाहरी समर्थन से चंद्रशेखर के नेतृत्व में नई सरकार बनी। 8. मार्च 1991 — चंद्रशेखर सरकार का पतन

कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद मध्यावधि चुनाव की स्थिति बनी।

9. 1984 और 1989 के परिणामों की तुलना

राजनीतिक दल1984–851989
कांग्रेस414197
जनता दलतब अस्तित्व में नहीं143
भाजपा285
माकपा2233
भाकपा612
तेलुगु देशम302
अन्नाद्रमुक1211
बहुजन समाज पार्टी03

कांग्रेस की सीटें 217 कम हुईं। 1984–85 का परिणाम विस्तारित अवधि का है, जबकि 1989 में 529 सीटों पर चुनाव संपन्न हुआ था।

भाजपा ने 1984 की तुलना में 83 अतिरिक्त सीटें जीतीं।

10. पहले नौ लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन

चुनाव वर्षकांग्रेस सीटेंराष्ट्रीय वोट शेयर
1951–5236444.99%
195737147.78%
196236144.72%
196728340.78%
197135243.68%
197715434.52%
198035342.69%
1984–85414लगभग 48.12%
198919739.53%

11. मूल आधिकारिक स्रोत

इस अध्ययन में भारत निर्वाचन आयोग की मूल रिपोर्ट को प्राथमिक स्रोत बनाया गया है।

Statistical Report on General Elections, 1989 — Ninth Lok Sabha, Volume I

इस रिपोर्ट में निम्न खंड शोध के लिए महत्वपूर्ण हैं: राजनीतिक दलों की सूची (पृष्ठ 1–3), मतदाता एवं मतदान (पृष्ठ 4–6), विजयी उम्मीदवार (पृष्ठ 72–84), राज्यवार परिणाम (पृष्ठ 86–93), तथा दलवार मत प्रतिशत (पृष्ठ 94–100)।

चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि और सरकार गठन के लिए अंतर-संसदीय संघ : 1989 भारत लोकसभा चुनाव का ऐतिहासिक विवरण भी उपयोगी स्रोत है।

12. नौवें लोकसभा चुनाव का ऐतिहासिक महत्व

1989 के चुनाव के परिणाम पाँच प्रमुख राजनीतिक परिवर्तनों से जुड़े थे।

पहला, कांग्रेस लोकसभा की सबसे बड़ी पार्टी रहने के बावजूद केंद्र की सत्ता से बाहर हो गई। दूसरा, जनता दल के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार बनी। तीसरा, भाजपा दो से 85 लोकसभा सीटों तक पहुँची। चौथा, बहुजन समाज पार्टी ने पहली बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व हासिल किया। पाँचवाँ, गैर-कांग्रेसी सरकार के गठन में बाहर से संसदीय समर्थन देने वाले दलों की भूमिका निर्णायक बनी।

1989 का चुनाव आगे के मंडल आयोग संबंधी राजनीतिक संघर्ष, अयोध्या आंदोलन और केंद्र में गठबंधन सरकारों के दौर को समझने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य: 1989 में कांग्रेस को 39.53 प्रतिशत मत और 197 सीटें मिलीं। जनता दल को 17.79 प्रतिशत मत और 143 सीटें मिलीं। इसके बावजूद केंद्र में जनता दल के नेतृत्व की सरकार बनी, क्योंकि सरकार गठन केवल सबसे बड़ी पार्टी होने पर नहीं, बल्कि लोकसभा में बहुमत का समर्थन जुटाने पर निर्भर करता है।

इसके बाद 1991 का दसवाँ लोकसभा चुनाव राजीव गांधी की हत्या, चरणों में मतदान, पंजाब में स्थगित चुनाव और पी. वी. नरसिंह राव के नेतृत्व में कांग्रेस की अल्पमत सरकार के गठन के कारण भारतीय संसदीय इतिहास का एक और महत्वपूर्ण अध्याय बना।

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स्रोत

निर्वाचन आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टें · संकलन और तालिका-सुधार की टिप्पणी