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OCN Research Desk · भारतीय संसदीय लोकतंत्र

भारत का सोलहवाँ लोकसभा चुनाव 2014 : नरेंद्र मोदी का उदय, भाजपा को पूर्ण बहुमत और कांग्रेस की ऐतिहासिक पराजय

राज्यवार सीटें, दलवार नतीजे और मत प्रतिशत, प्रमुख नेता तथा चुनावी घटनाक्रम

ओमकार चौधरी / OCN Research Deskस्वतंत्र शोध अध्याय · 27 अक्टूबर 2026
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भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — सोलहवाँ अध्याय

भारत का सोलहवाँ लोकसभा आम चुनाव 7 अप्रैल से 12 मई 2014 के बीच नौ चरणों में हुआ। 16 मई को परिणाम घोषित हुए। इस चुनाव ने भारत की राजनीति में बड़ा परिवर्तन किया। दस वर्षों से केंद्र में शासन कर रहे कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को पराजय मिली और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार अपने दम पर लोकसभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया।

भाजपा ने 543 में से 282 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस 2009 की 206 सीटों से घटकर केवल 44 पर आ गई। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को कुल 336 सीटें प्राप्त हुईं।

भाजपा को 31.00 प्रतिशत और कांग्रेस को 19.31 प्रतिशत राष्ट्रीय मत मिले। लगभग 66.44 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो उस समय तक के सभी लोकसभा चुनावों में सर्वाधिक था।

26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 1984 के बाद पहली बार किसी एक राजनीतिक दल को लोकसभा में अपने दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ था।

कुल लोकसभा सीटें
543
भाजपा की सीटें
282
कांग्रेस की सीटें
44
एनडीए की सीटें
336

1. सोलहवें लोकसभा चुनाव के प्रमुख आँकड़े

चुनाव संबंधी विवरणआँकड़े
लोकसभासोलहवीं
मतदान की अवधि7 अप्रैल–12 मई 2014
मतदान के चरण9
मतगणना16 मई 2014
निर्वाचित लोकसभा सीटें543
बहुमत का आँकड़ा272
सामान्य सीटें412
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित84
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित47
पंजीकृत मतदाता83,40,82,814
मतदान करने वाले55,41,75,255
मतदान प्रतिशत66.44%
चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार8,251
महिला उम्मीदवार668
निर्वाचित महिला सांसद62
भाग लेने वाले राजनीतिक दल464
राष्ट्रीय दल6
राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त दल39
अन्य पंजीकृत दल419
मतदान केंद्रलगभग 9.28 लाख
भाजपा की सीटें282
कांग्रेस की सीटें44
चुनाव से पहले प्रधानमंत्रीडॉ. मनमोहन सिंह
चुनाव के बाद प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी
मुख्य निर्वाचन आयुक्तवी. एस. संपत

स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग का 2014 चुनाव सांख्यिकीय विवरण तथा लोकसभा सचिवालय।

2. 2014 के चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि

2004 से 2014 तक केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी। डॉ. मनमोहन सिंह लगातार दस वर्ष प्रधानमंत्री रहे। 2009 में कांग्रेस ने 206 सीटें जीती थीं और यूपीए दूसरी बार सत्ता में आया था।

लेकिन 2009 से 2014 के बीच कई राजनीतिक और आर्थिक घटनाएँ चुनावी बहस का केंद्र बनीं।

1. 2010 — राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

खेल आयोजन में विभिन्न ठेकों और खर्च को लेकर जाँचें तथा राजनीतिक विवाद सामने आए। 2. 2010–12 — 2जी स्पेक्ट्रम और कोयला आवंटन विवाद

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों से दूरसंचार स्पेक्ट्रम तथा कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े सवाल राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख बने। आरोपों और बाद के न्यायिक निर्णयों में अंतर है। 3. 2011 — अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन

लोकपाल कानून की माँग को लेकर देश के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन हुए। इस आंदोलन से अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं की राजनीतिक पहचान बढ़ी। 4. 2012 — निर्भया घटना और देशव्यापी आंदोलन

दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद व्यापक प्रदर्शन हुए। 2013 में आपराधिक कानून में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। 5. 2012–13 — आर्थिक चुनौतियाँ

महँगाई, रुपये की विनिमय दर, आर्थिक वृद्धि और रोजगार से जुड़े प्रश्नों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस हुई। 6. सितंबर 2013 — नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित

भाजपा ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। 7. 2013 — पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली और मिजोरम में चुनाव हुए। भाजपा ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया तथा छत्तीसगढ़ में भी सरकार बनाई। 8. फरवरी 2014 — आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून

संसद ने तेलंगाना के गठन का कानून पारित किया। इस कारण आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की राजनीतिक परिस्थितियाँ चुनाव में महत्वपूर्ण थीं।

3. चुनाव मैदान में प्रमुख राजनीतिक दल और उनके नेता

राजनीतिक दलप्रमुख नेता
भारतीय जनता पार्टीनरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेससोनिया गांधी, राहुल गांधी, डॉ. मनमोहन सिंह
बहुजन समाज पार्टीमायावती
समाजवादी पार्टीमुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव
आम आदमी पार्टीअरविंद केजरीवाल
अन्नाद्रमुकजे. जयललिता
तृणमूल कांग्रेसममता बनर्जी
बीजू जनता दलनवीन पटनायक
तेलुगु देशम पार्टीएन. चंद्रबाबू नायडू
तेलंगाना राष्ट्र समितिके. चंद्रशेखर राव
वाईएसआर कांग्रेस पार्टीवाई. एस. जगन मोहन रेड्डी
शिवसेनाउद्धव ठाकरे
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टीशरद पवार
लोक जनशक्ति पार्टीरामविलास पासवान
राष्ट्रीय जनता दललालू प्रसाद यादव
जनता दल (यूनाइटेड)नीतीश कुमार, शरद यादव
राष्ट्रीय लोक समता पार्टीउपेंद्र कुशवाहा
अपना दलअनुप्रिया पटेल
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टीप्रकाश करात, सीताराम येचुरी
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टीए. बी. बर्धन
डीएमकेएम. करुणानिधि, एम. के. स्टालिन
शिरोमणि अकाली दलप्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल
इंडियन नेशनल लोकदलओमप्रकाश चौटाला
असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंटबदरुद्दीन अजमल
जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टीमुफ्ती मोहम्मद सईद, महबूबा मुफ्ती
झारखंड मुक्ति मोर्चाशिबू सोरेन, हेमंत सोरेन
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीनअसदुद्दीन ओवैसी

इन नामों में संबंधित दलों के औपचारिक अध्यक्षों के साथ प्रमुख प्रचारक, मुख्यमंत्री और संसदीय नेता भी शामिल हैं।

एक महत्वपूर्ण तथ्य: 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह थे। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी थे। कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी थीं, जबकि राहुल गांधी पार्टी के उपाध्यक्ष और प्रमुख चुनाव प्रचारकों में थे।

4. किस पार्टी को कितनी सीटें और कितना वोट शेयर मिला?

2014 में भाजपा ने 282 सीटें जीतकर लोकसभा की 51.93 प्रतिशत निर्वाचित सीटें हासिल कीं। राष्ट्रीय वोट शेयर 31 प्रतिशत था।

कांग्रेस को 19.31 प्रतिशत वोट मिले, लेकिन वह 44 सीटों पर सिमट गई। अन्नाद्रमुक 37 सीटों के साथ तीसरे और तृणमूल कांग्रेस 34 सीटों के साथ चौथे स्थान पर रही।

राजनीतिक दलसीटेंराष्ट्रीय वोट शेयर
भारतीय जनता पार्टी28231.00%
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस4419.31%
अन्नाद्रमुक373.27%
तृणमूल कांग्रेस343.84%
बीजू जनता दल201.80%
शिवसेना181.85%
तेलुगु देशम पार्टी162.55%
तेलंगाना राष्ट्र समिति111.34%
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी93.25%
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी92.53%
लोक जनशक्ति पार्टी60.41%
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी61.56%
समाजवादी पार्टी53.47%
आम आदमी पार्टी42.05%
राष्ट्रीय जनता दल41.34%
शिरोमणि अकाली दल40.66%
असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट30.42%
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी30.19%
जम्मू-कश्मीर पीडीपी30.13%
जनता दल (यूनाइटेड)21.08%
जनता दल (सेक्युलर)20.67%
इंडियन नेशनल लोकदल20.51%
झारखंड मुक्ति मोर्चा20.30%
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग20.27%
अपना दल20.15%
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी10.78%
पट्टाली मक्कल कच्ची10.33%
एमआईएम10.15%
बहुजन समाज पार्टी04.14%
अन्य विजयी दल और निर्दलीय10—

अन्य सीट जीतने वालों में आरएसपी, स्वाभिमानी पक्ष, नगालैंड पीपुल्स फ्रंट, नेशनल पीपुल्स पार्टी, केरल कांग्रेस (एम), ऑल इंडिया एन. आर. कांग्रेस और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट शामिल थे। तीन निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्वाचित हुए।

राष्ट्रीय मत प्रतिशत पूर्णांकित हैं और कुछ क्षेत्रीय दलों के लिए स्रोतों में मामूली अंतर संभव है। सीटों की मूल पुष्टि निर्वाचन आयोग के दलवार आँकड़ों से होती है।

मत प्रतिशत और सीटों के चार विशेष तथ्य

पहला: भाजपा को 31 प्रतिशत मत प्राप्त हुए, लेकिन उसने 51.93 प्रतिशत लोकसभा सीटें जीतीं। उसे बहुमत के लिए आवश्यक 272 से दस अधिक सीटें मिलीं।

दूसरा: कांग्रेस को भाजपा की तुलना में लगभग 11.69 प्रतिशत अंक कम वोट मिले, लेकिन सीटों में अंतर 238 का रहा।

तीसरा: बहुजन समाज पार्टी को 4.14 प्रतिशत राष्ट्रीय वोट मिले, जो अन्नाद्रमुक और तृणमूल कांग्रेस से अधिक थे। फिर भी बसपा एक भी सीट नहीं जीत सकी।

चौथा: अन्नाद्रमुक और तृणमूल कांग्रेस ने सीमित राज्यों में चुनाव लड़ते हुए क्रमशः 37 और 34 सीटें जीतीं। इससे क्षेत्रीय दलों के मतों के भौगोलिक संकेंद्रण का महत्व स्पष्ट होता है।

5. किस राज्य में कितनी लोकसभा सीटें थीं और किस पार्टी को कितनी मिलीं?

2014 के चुनाव में एक विशेष प्रशासनिक परिस्थिति थी। तेलंगाना के गठन का कानून पारित हो चुका था, लेकिन राज्य औपचारिक रूप से 2 जून 2014 को अस्तित्व में आया। मतदान के समय आंध्र प्रदेश अविभाजित था। इसलिए निर्वाचन आयोग की मूल चुनाव तालिका में उसकी 42 सीटों का संयुक्त विवरण मिलता है।

नीचे तुलनात्मक सुविधा के लिए आंध्र प्रदेश की 25 और तेलंगाना क्षेत्र की 17 सीटें अलग दिखाई गई हैं।

राज्य / केंद्रशासित प्रदेशकुल सीटेंभाजपाकांग्रेसअन्य
उत्तर प्रदेश807127
महाराष्ट्र4823223
पश्चिम बंगाल422436
बिहार4022216
तमिलनाडु391038
मध्य प्रदेश292720
कर्नाटक281792
गुजरात262600
आंध्र प्रदेश (शेष क्षेत्र)252023
राजस्थान252500
ओडिशा211020
केरल200812
तेलंगाना क्षेत्र171214
असम14734
झारखंड141202
पंजाब13238
छत्तीसगढ़111010
हरियाणा10712
दिल्ली7700
जम्मू-कश्मीर6303
उत्तराखंड5500
हिमाचल प्रदेश4400
अरुणाचल प्रदेश2110
गोवा2200
मणिपुर2020
मेघालय2011
त्रिपुरा2002
मिजोरम1010
नगालैंड1001
सिक्किम1001
अंडमान एवं निकोबार1100
चंडीगढ़1100
दादरा एवं नगर हवेली1100
दमन और दीव1100
लक्षद्वीप1001
पुडुचेरी1001
कुल54328244217

स्रोत: निर्वाचन आयोग के राज्यवार परिणाम। आंध्र प्रदेश–तेलंगाना को अलग दिखाने का आधार संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति है।

भाजपा ने किन राज्यों की सभी सीटें जीतीं?

गुजरात की सभी 26, राजस्थान की सभी 25, दिल्ली की सभी सात, उत्तराखंड की सभी पाँच और हिमाचल प्रदेश की सभी चार सीटें भाजपा ने जीतीं। गोवा की दोनों सीटों पर भी भाजपा को विजय मिली।

उत्तर प्रदेश में भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल ने मिलकर 80 में से 73 सीटें हासिल कीं।

6. महत्वपूर्ण राज्यों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों का प्रदर्शन

राज्यप्रमुख दलों को मिली सीटें
उत्तर प्रदेशभाजपा 71, सपा 5, कांग्रेस 2, अपना दल 2
बिहारभाजपा 22, लोजपा 6, राजद 4, रालोसपा 3, कांग्रेस 2, जदयू 2, एनसीपी 1
महाराष्ट्रभाजपा 23, शिवसेना 18, एनसीपी 4, कांग्रेस 2, स्वाभिमानी पक्ष 1
पश्चिम बंगालतृणमूल 34, कांग्रेस 4, माकपा 2, भाजपा 2
मध्य प्रदेशभाजपा 27, कांग्रेस 2
तमिलनाडुअन्नाद्रमुक 37, भाजपा 1, पीएमके 1
आंध्र प्रदेश (शेष क्षेत्र)तेलुगु देशम 15, वाईएसआर कांग्रेस 8, भाजपा 2
तेलंगाना क्षेत्रटीआरएस 11, कांग्रेस 2, तेलुगु देशम 1, भाजपा 1, वाईएसआर कांग्रेस 1, एमआईएम 1
कर्नाटकभाजपा 17, कांग्रेस 9, जद (सेक्युलर) 2
गुजरातभाजपा 26
राजस्थानभाजपा 25
ओडिशाबीजद 20, भाजपा 1
केरलकांग्रेस 8, माकपा 5, मुस्लिम लीग 2, निर्दलीय 2, भाकपा 1, आरएसपी 1, केरल कांग्रेस (एम) 1
असमभाजपा 7, कांग्रेस 3, एआईयूडीएफ 3, निर्दलीय 1
झारखंडभाजपा 12, झामुमो 2
पंजाबअकाली दल 4, आम आदमी पार्टी 4, कांग्रेस 3, भाजपा 2
छत्तीसगढ़भाजपा 10, कांग्रेस 1
हरियाणाभाजपा 7, इनेलो 2, कांग्रेस 1
दिल्लीभाजपा 7
जम्मू-कश्मीरभाजपा 3, पीडीपी 3

उत्तर प्रदेश : भाजपा और अपना दल को 73 सीटें

दलसीटेंराज्य में वोट शेयर
भाजपा7142.32%
समाजवादी पार्टी522.18%
बहुजन समाज पार्टी019.62%
कांग्रेस27.47%
अपना दल21.00%

2009 में उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के 21, भाजपा के दस, सपा के 23 और बसपा के 20 सांसद निर्वाचित हुए थे।

2014 में भाजपा की सीटें दस से बढ़कर 71 हो गईं। कांग्रेस की संख्या 21 से घटकर दो, सपा की 23 से घटकर पाँच और बसपा की 20 से शून्य रह गई।

समाजवादी पार्टी के पाँचों निर्वाचित सांसद मुलायम सिंह यादव के परिवार से जुड़े थे। मुलायम सिंह ने मैनपुरी और आजमगढ़, दोनों सीटें जीती थीं; उन्होंने बाद में मैनपुरी सीट छोड़ी। इस कारण पाँच सीटों पर शुरुआती जीत और निर्वाचित व्यक्तियों की गणना को अलग समझना चाहिए।

7. चुनाव की आठ प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ

1. नरेंद्र मोदी पहली बार राष्ट्रीय चुनाव का नेतृत्व कर रहे थे

गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर 2013 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किए गए। उन्होंने देशभर में बड़ी संख्या में चुनावी सभाएँ कीं।

चुनाव प्रचार में विकास, रोजगार, महँगाई, भ्रष्टाचार और शासन संबंधी मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। ‘अबकी बार मोदी सरकार’ भाजपा का प्रमुख चुनावी नारा था।

2. कांग्रेस की सीटें 206 से घटकर 44 हुईं

सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने राहुल गांधी सहित अपने प्रमुख नेताओं के साथ चुनाव प्रचार किया।

कांग्रेस को 19.31 प्रतिशत राष्ट्रीय वोट मिले। दस वर्ष सत्ता में रहने के बाद पार्टी 44 सीटों पर रह गई। किसी आम चुनाव में यह उस समय तक कांग्रेस का सबसे कम संसदीय प्रतिनिधित्व था।

3. आम आदमी पार्टी का पहला लोकसभा चुनाव

2012 में स्थापित आम आदमी पार्टी ने 2014 में अपना पहला लोकसभा आम चुनाव लड़ा।

अरविंद केजरीवाल ने वाराणसी से नरेंद्र मोदी के विरुद्ध चुनाव लड़ा, लेकिन पराजित हुए। पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर चार सीटें मिलीं और सभी पंजाब से थीं।

4. जयललिता की अन्नाद्रमुक ने 37 सीटें जीतीं

तमिलनाडु की 39 में से 37 सीटें अन्नाद्रमुक को मिलीं। भाजपा और पीएमके ने एक-एक सीट जीती।

कांग्रेस और डीएमके दोनों एक भी सीट नहीं जीत सके। अन्नाद्रमुक तीसरी सबसे बड़ी लोकसभा पार्टी बनी।

5. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को 34 सीटें

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 42 में से 34 सीटें जीतीं।

2009 में तृणमूल को 19 सीटें मिली थीं। 2014 में उसकी संख्या 34 हो गई। वामपंथी दलों का प्रतिनिधित्व काफी घटा।

6. ओडिशा में नवीन पटनायक का प्रदर्शन

बीजू जनता दल ने राज्य की 21 में से 20 लोकसभा सीटें जीतीं। भाजपा को एक सीट मिली और कांग्रेस कोई सीट नहीं जीत सकी।

उसी समय विधानसभा चुनाव में भी बीजद ने बहुमत हासिल किया और नवीन पटनायक मुख्यमंत्री बने रहे।

7. आंध्र प्रदेश विभाजन और क्षेत्रीय दलों की सफलता

अविभाजित आंध्र प्रदेश की 42 सीटों में तेलुगु देशम को 16, टीआरएस को 11 और वाईएसआर कांग्रेस को नौ सीटें मिलीं।

कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें मिलीं, दोनों तेलंगाना क्षेत्र में। राज्य विभाजन इस चुनाव का महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ था।

8. उत्तर प्रदेश में भाजपा का व्यापक विस्तार

2014 में अमित शाह भाजपा के उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी थे। पार्टी ने प्रदेश की 80 में से 71 सीटें जीतीं।

सहयोगी अपना दल की दो सीटों सहित एनडीए के पास उत्तर प्रदेश से 73 सांसद हो गए। इस राज्य के परिणाम ने भाजपा के राष्ट्रीय बहुमत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

8. प्रमुख नेताओं के चर्चित चुनावी मुकाबले

निर्वाचन क्षेत्रविजेताप्रमुख प्रतिद्वंद्वी / परिणाम
वाराणसीनरेंद्र मोदी, भाजपाअरविंद केजरीवाल पर जीत
वडोदरानरेंद्र मोदी, भाजपाकांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री पर जीत
अमेठीराहुल गांधी, कांग्रेसस्मृति ईरानी पर जीत
रायबरेलीसोनिया गांधी, कांग्रेसभाजपा के अजय अग्रवाल पर जीत
लखनऊराजनाथ सिंह, भाजपाकांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी सहित प्रतिद्वंद्वी
गांधीनगरलालकृष्ण आडवाणी, भाजपाकांग्रेस प्रत्याशी पर जीत
मैनपुरी एवं आजमगढ़मुलायम सिंह यादव, सपादोनों सीटों से जीत
सुल्तानपुरवरुण गांधी, भाजपाविजय
पीलीभीतमेनका गांधी, भाजपाविजय
हैदराबादअसदुद्दीन ओवैसी, एमआईएमलगातार तीसरी जीत

वाराणसी : नरेंद्र मोदी बनाम अरविंद केजरीवाल

प्रत्याशीप्राप्त मत
नरेंद्र मोदी — भाजपा5,81,022
अरविंद केजरीवाल — आप2,09,238
अजय राय — कांग्रेस75,614

नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर

3,71,784 वोट

नरेंद्र मोदी ने वडोदरा से भी चुनाव जीता। बाद में उन्होंने वडोदरा सीट छोड़कर वाराणसी सीट अपने पास रखी।

अमेठी : राहुल गांधी बनाम स्मृति ईरानी

प्रत्याशीप्राप्त मत
राहुल गांधी — कांग्रेस4,08,651
स्मृति ईरानी — भाजपा3,00,748
कुमार विश्वास — आप25,527

राहुल गांधी की जीत का अंतर

1,07,903 वोट

यह मुकाबला इसलिए महत्वपूर्ण रहा कि 2009 में राहुल गांधी की अमेठी से जीत का अंतर लगभग 3.70 लाख वोट था, जो 2014 में घटकर करीब 1.08 लाख रह गया।

निर्वाचन क्षेत्रवार मूल परिणाम निर्वाचन आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्ट में उपलब्ध हैं।

9. एनडीए को 336 सीटें कैसे मिलीं?

2014 में भाजपा के पास अपने दम पर 282 सीटें थीं। उसके प्रमुख सहयोगियों के परिणाम इस प्रकार थे।

एनडीए का प्रमुख दलसीटें
भाजपा282
शिवसेना18
तेलुगु देशम पार्टी16
लोक जनशक्ति पार्टी6
शिरोमणि अकाली दल4
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी3
अपना दल2
अन्य छोटे सहयोगी दल एवं समर्थक5
एनडीए कुल336

गठबंधन की गणना 2014 के चुनाव-समय के राजनीतिक वर्गीकरण के अनुसार है। बाद के वर्षों में सहयोगियों की स्थिति बदलती रही।

भाजपा को अकेले बहुमत मिलने का अर्थ था कि सरकार गठन के लिए उसे सहयोगियों की सीटें जोड़ने की अनिवार्यता नहीं थी। इसके बावजूद उसने एनडीए गठबंधन के रूप में सरकार बनाई।

26 मई 2014 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई।

10. 2009 और 2014 के चुनावों की तुलना

राजनीतिक दल20092014परिवर्तन
भाजपा116282\+166
कांग्रेस20644−162
अन्नाद्रमुक937\+28
तृणमूल कांग्रेस1934\+15
बीजू जनता दल1420\+6
शिवसेना1118\+7
तेलुगु देशम616\+10
माकपा169−7
समाजवादी पार्टी235−18
बसपा210−21
डीएमके180−18
जदयू202−18
आम आदमी पार्टीअस्तित्व में नहीं4नया दल

वोट शेयर की तुलना

दल20092014
भाजपा18.80%31.00%
कांग्रेस28.55%19.31%
बसपा6.17%4.14%
माकपा5.33%3.25%
सपा3.42%3.47%
तृणमूल3.20%3.84%

भाजपा के राष्ट्रीय वोट शेयर में 12.20 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई। कांग्रेस के वोट शेयर में 9.24 अंकों की गिरावट हुई।

11. सोलहवीं लोकसभा के कार्यकाल की महत्वपूर्ण घटनाएँ (2014–2019)

वर्ष / तारीखप्रमुख घटना
26 मई 2014नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने
अगस्त 2014प्रधानमंत्री जन धन योजना शुरू
सितंबर 2014मेक इन इंडिया कार्यक्रम शुरू
अक्टूबर 2014स्वच्छ भारत मिशन शुरू
जनवरी 2015नीति आयोग का गठन
2015डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत
सितंबर 2016उरी आतंकवादी हमले के बाद नियंत्रण रेखा पार लक्षित सैन्य कार्रवाई
8 नवंबर 2016₹500 और ₹1,000 के तत्कालीन नोटों का विमुद्रीकरण
जुलाई 2017वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू
2018आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का शुभारंभ
सितंबर 2018सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक वयस्कों के सहमति-आधारित संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया
जनवरी 2019आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण संबंधी 103वाँ संविधान संशोधन
14 फरवरी 2019पुलवामा आतंकवादी हमला
26 फरवरी 2019बालाकोट में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई
अप्रैल–मई 2019सत्रहवाँ लोकसभा चुनाव

ये घटनाएँ सोलहवीं लोकसभा के कार्यकाल के दौरान हुईं। इनमें से कई 2019 के अगले आम चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि का हिस्सा बनीं।

12. पहले सोलह लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और जनसंघ/भाजपा का प्रदर्शन

वर्षकांग्रेस की सीटेंजनसंघ / भाजपा की सीटें
1951–523643
19573714
196236114
196728335
197135222
1977154जनसंघ जनता पार्टी में समाहित
1980353भाजपा का गठन चुनाव बाद
1984–854142
198919785
1991–92244120
1996140161
1998141182
1999114182
2004145138
2009206116
201444282

13. मूल आधिकारिक स्रोत

2014 के चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण शोध सामग्री निर्वाचन आयोग के ऐतिहासिक अभिलेखों और लोकसभा सचिवालय की रिपोर्ट में उपलब्ध है।

14. सोलहवें लोकसभा चुनाव का ऐतिहासिक महत्व

2014 का चुनाव भारतीय राजनीति में पाँच प्रमुख परिवर्तनों से जुड़ा था।

पहला, भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटों के साथ अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया। दूसरा, कांग्रेस 44 सीटों पर आ गई और दस वर्षों बाद केंद्र की सत्ता से बाहर हुई। तीसरा, भाजपा को उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और अनेक अन्य राज्यों से व्यापक संसदीय समर्थन मिला।

चौथा, अन्नाद्रमुक, तृणमूल कांग्रेस और बीजू जनता दल जैसे क्षेत्रीय दलों ने अपने-अपने राज्यों में महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व हासिल किया। पाँचवाँ, आम आदमी पार्टी जैसी नई राजनीतिक शक्ति पहली बार लोकसभा में पहुँची।

एक संवैधानिक दृष्टि से उल्लेखनीय स्थिति यह भी बनी कि कांग्रेस के केवल 44 सांसद होने के कारण उसे लोकसभा में औपचारिक नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं दिया गया। इस पद के लिए प्रचलित दस प्रतिशत सीटों की शर्त का हवाला दिया गया था, हालाँकि उस शर्त के विधिक आधार और अनिवार्यता पर मतभेद रहे हैं।

2014 का केंद्रीय ऐतिहासिक तथ्य: 1984 में कांग्रेस ने 400 से अधिक सीटें जीती थीं। उसके तीस वर्ष बाद 2014 में भाजपा ने 282 सीटों के साथ एकदलीय बहुमत हासिल किया। इस परिणाम के साथ केंद्र में दस वर्ष से चली आ रही यूपीए सरकार की जगह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी।

इसके बाद 2019 के सत्रहवें लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 282 से बढ़कर 303 हो गईं और नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।

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स्रोत

निर्वाचन आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टें · संकलन और तालिका-सुधार की टिप्पणी