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OCN Research Desk · भारतीय संसदीय लोकतंत्र

भारत का ग्यारहवाँ लोकसभा चुनाव 1996 : भाजपा पहली बार सबसे बड़ी पार्टी, वाजपेयी की 13 दिन की सरकार और संयुक्त मोर्चे का दौर

राज्यवार सीटें, दलवार नतीजे और मत प्रतिशत, प्रमुख नेता तथा चुनावी घटनाक्रम

ओमकार चौधरी / OCN Research Deskस्वतंत्र शोध अध्याय · 27 अक्टूबर 2026
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भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — ग्यारहवाँ अध्याय

भारत का ग्यारहवाँ लोकसभा आम चुनाव अप्रैल–मई 1996 में हुआ। यह चुनाव भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। 1991 में कांग्रेस के नेतृत्व में बनी पी. वी. नरसिंह राव की सरकार ने अपना पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा किया, लेकिन 1996 के चुनाव में कांग्रेस की सीटें घटकर 140 रह गईं।

भारतीय जनता पार्टी 161 सीटों के साथ पहली बार लोकसभा की सबसे बड़ी पार्टी बनी। राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। वाजपेयी ने 16 मई 1996 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन आवश्यक बहुमत न जुटा पाने के कारण 28 मई को इस्तीफा दे दिया।

इसके बाद जनता दल, वामपंथी और क्षेत्रीय दलों के संयुक्त मोर्चे ने कांग्रेस के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई। 1 जून 1996 को एच. डी. देवेगौड़ा और 21 अप्रैल 1997 को इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने।

इस प्रकार ग्यारहवीं लोकसभा के लगभग दो वर्ष के कार्यकाल में तीन प्रधानमंत्री रहे।

कुल निर्वाचित सीटें
543
भाजपा की सीटें
161
कांग्रेस की सीटें
140
जनता दल की सीटें
46

1. ग्यारहवें लोकसभा चुनाव के प्रमुख आँकड़े

विषयविवरण
चुनाव वर्ष1996
मुख्य चुनाव अवधि27 अप्रैल से मई 1996
कुछ क्षेत्रों में मतदान30 मई तक
कुल निर्वाचित सीटें543
बहुमत का आँकड़ा272
सामान्य सीटें423
अनुसूचित जाति आरक्षित79
अनुसूचित जनजाति आरक्षित41
पंजीकृत मतदाता59,25,72,288
मतदान करने वाले34,33,08,035
मतदान प्रतिशत57.94%
कुल वैध मत33,48,73,286
कुल उम्मीदवार13,952
निर्वाचित महिला सांसद39
मुख्य निर्वाचन आयुक्तटी. एन. शेषन
सबसे बड़ी पार्टीभाजपा — 161
दूसरे स्थान परकांग्रेस — 140
तीसरे स्थान परजनता दल — 46
चौथे स्थान परमार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी — 32

निर्वाचन आयोग के अनुसार 1996 में पहली बार एक ही लोकसभा चुनाव में लगभग 14 हजार उम्मीदवार मैदान में उतरे। इनमें 10,636 निर्दलीय उम्मीदवार थे। केवल नौ निर्दलीय जीत पाए।

इन चुनावों में सभी 543 निर्वाचित सीटों के परिणाम दर्ज हुए।

2. 1996 के चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि

1991 से 1996 तक पी. वी. नरसिंह राव की सरकार सत्ता में रही। इस अवधि में देश में आर्थिक उदारीकरण, अयोध्या विवाद, राजनीतिक दलों के पुनर्गठन और भ्रष्टाचार के कई आरोपों से जुड़े विवाद सामने आए।

प्रमुख घटनाओं की समयरेखा

1. 1991 — नरसिंह राव सरकार और आर्थिक उदारीकरण

डॉ. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री बने। औद्योगिक लाइसेंस, विदेशी निवेश, व्यापार और आर्थिक नीतियों में परिवर्तन शुरू हुए। 2. 6 दिसंबर 1992 — अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद का विध्वंस

इस घटना ने राष्ट्रीय राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों पर व्यापक प्रभाव डाला। इसके बाद भाजपा शासित चार राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश—की सरकारें बर्खास्त की गईं। 3. 1993 — नरसिंह राव सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव

सरकार ने विश्वास मत जीता। बाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा सांसदों को कथित रिश्वत देने से संबंधित प्रकरण सामने आया, जिसने व्यापक विवाद उत्पन्न किया। 4. 1995 — कांग्रेस के भीतर विभाजन

अर्जुन सिंह और एन. डी. तिवारी सहित कुछ नेताओं ने कांग्रेस से अलग होकर ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) का गठन किया। 5. मार्च–अप्रैल 1996 — चुनावी अभियान

भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व और कांग्रेस ने पी. वी. नरसिंह राव के नेतृत्व में चुनाव लड़ा। जनता दल, वाम दल तथा कई क्षेत्रीय दल अलग-अलग गठबंधनों के साथ मैदान में उतरे। 6. मई 1996 — खंडित जनादेश

किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। भाजपा 161 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी।

1996 तक राष्ट्रीय राजनीति दो प्रमुख दलों तक सीमित नहीं रह गई थी। क्षेत्रीय दलों का समर्थन केंद्र में सरकार बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुका था।

3. चुनाव मैदान में प्रमुख राजनीतिक दल और उनके नेता

राजनीतिक दलप्रमुख नेता
भारतीय जनता पार्टीअटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसपी. वी. नरसिंह राव
जनता दलएच. डी. देवेगौड़ा, लालू प्रसाद यादव, शरद यादव
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टीहरकिशन सिंह सुरजीत, ज्योति बसु
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टीइंद्रजीत गुप्त, ए. बी. बर्धन
तमिल मनीला कांग्रेसजी. के. मूपनार, पी. चिदंबरम
समाजवादी पार्टीमुलायम सिंह यादव
बहुजन समाज पार्टीकांशीराम, मायावती
डीएमकेएम. करुणानिधि
तेलुगु देशम पार्टीएन. चंद्रबाबू नायडू
शिवसेनाबाल ठाकरे, मनोहर जोशी
समता पार्टीजॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार
शिरोमणि अकाली दलप्रकाश सिंह बादल
असम गण परिषदप्रफुल्ल कुमार महंत
ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी)एन. डी. तिवारी, अर्जुन सिंह
हरियाणा विकास पार्टीबंसीलाल
झारखंड मुक्ति मोर्चाशिबू सोरेन
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टीत्रिदीब चौधरी
ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉकचित्त बसु
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीगई. अहमद, जी. एम. बनातवाला
अन्नाद्रमुकजे. जयललिता
केरल कांग्रेस (एम)के. एम. मणि

यह सूची औपचारिक पार्टी अध्यक्षों के साथ उन नेताओं को भी शामिल करती है जो संगठन, प्रचार या संसदीय राजनीति में प्रभावशाली थे।

दो विशेष बातें: समाजवादी पार्टी का गठन मुलायम सिंह यादव ने 1992 में किया था। इसलिए 1996 उसके लिए पहला लोकसभा आम चुनाव था। तमिल मनीला कांग्रेस भी 1996 में जी. के. मूपनार द्वारा कांग्रेस से अलग होकर बनाई गई थी।

4. किस पार्टी को कितनी सीटें और कितना वोट प्रतिशत मिला?

1996 में कांग्रेस को भाजपा से अधिक वोट मिले, लेकिन भाजपा ने उससे 21 सीटें ज्यादा जीत लीं। भाजपा 161 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि कांग्रेस 140 सीटों पर रही।

नीचे सभी प्रमुख सीट-विजेता दलों के आधिकारिक परिणाम दिए गए हैं।

राजनीतिक दलसीटेंराष्ट्रीय वोट शेयर
भारतीय जनता पार्टी16120.29%
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस14028.80%
जनता दल468.08%
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी326.12%
तमिल मनीला कांग्रेस202.19%
समाजवादी पार्टी173.28%
डीएमके172.14%
तेलुगु देशम पार्टी162.97%
शिवसेना151.49%
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी121.97%
बहुजन समाज पार्टी114.02%
समता पार्टी82.17%
शिरोमणि अकाली दल80.76%
असम गण परिषद50.76%
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी50.63%
ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी)41.46%
फॉरवर्ड ब्लॉक30.38%
हरियाणा विकास पार्टी30.35%
मुस्लिम लीग20.23%
झारखंड मुक्ति मोर्चा10.38%
कर्नाटक कांग्रेस पार्टी10.17%
केरल कांग्रेस (एम)10.11%
एमआईएम10.10%
मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस1लगभग 0.10%
स्वायत्त राज्य मांग समिति10.05%
महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी10.04%
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट10.04%
यूनाइटेड गोअन्स डेमोक्रेटिक पार्टी10.03%
निर्दलीय96.28%
कुल निर्वाचित सीटें543

ये पूरे भारत के वैध मतों पर आधारित प्रतिशत हैं, न कि केवल प्रत्येक दल द्वारा लड़ी गई सीटों के प्रतिशत। शून्य सीट पाने वाले दलों के मत भी राष्ट्रीय गणना में हैं, इसलिए तालिका के प्रतिशतों का योग 100 नहीं है। स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, 1996, खंड I, पृष्ठ 100–110।

मत प्रतिशत और सीटों का उल्लेखनीय अंतर

कांग्रेस को 28.80 प्रतिशत वोट मिले, जबकि भाजपा को 20.29 प्रतिशत। अर्थात कांग्रेस को भाजपा से 8.51 प्रतिशत अंक अधिक वोट मिले। इसके बावजूद भाजपा की 161 और कांग्रेस की 140 सीटें रहीं।

इसका कारण विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में मतों का अलग-अलग वितरण था। किसी दल का राष्ट्रीय मत प्रतिशत अधिक होने से यह आवश्यक नहीं कि उसे सबसे अधिक सीटें भी मिलें।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह थी कि बसपा को 4.02 प्रतिशत राष्ट्रीय मत मिले, लेकिन केवल 11 सीटें। इसके विपरीत तमिल मनीला कांग्रेस को 2.19 प्रतिशत मतों पर 20 सीटें मिलीं। तमिल मनीला कांग्रेस ने अपना चुनाव सीमित क्षेत्रों में केंद्रित रखा था।

5. राज्यवार लोकसभा सीटें : किस राज्य में कौन जीता?

1996 में वर्तमान झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड अलग राज्य नहीं बने थे। बिहार में झारखंड का क्षेत्र, मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में वर्तमान उत्तराखंड का क्षेत्र शामिल था।

नीचे तत्कालीन सभी 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का चुनाव परिणाम दिया गया है।

राज्य / केंद्रशासित प्रदेशकुल सीटेंकांग्रेसभाजपाअन्य
उत्तर प्रदेश8555228
बिहार5421834
महाराष्ट्र48151815
आंध्र प्रदेश4222020
पश्चिम बंगाल429033
मध्य प्रदेश408275
तमिलनाडु390039
कर्नाटक285617
गुजरात2610160
राजस्थान2512121
ओडिशा211605
केरल207013
असम14518
पंजाब132011
हरियाणा10244
दिल्ली7250
जम्मू-कश्मीर6411
हिमाचल प्रदेश4400
अरुणाचल प्रदेश2002
गोवा2002
मणिपुर2200
मेघालय2101
त्रिपुरा2002
मिजोरम1100
नगालैंड1100
सिक्किम1001
अंडमान-निकोबार1100
चंडीगढ़1010
दादरा-नगर हवेली1100
दमन और दीव1100
लक्षद्वीप1100
पांडिचेरी (पुडुचेरी)1100
कुल543140161242

मूल स्रोत: निर्वाचन आयोग की 1996 सांख्यिकीय रिपोर्ट, पृष्ठ 96–99, राज्यवार दलों की विजयी सीटें।

6. प्रमुख राज्यों में अन्य दलों को कितनी सीटें मिलीं?

राज्यप्रमुख दलवार परिणाम
उत्तर प्रदेशभाजपा 52, समाजवादी पार्टी 16, बसपा 6, कांग्रेस 5, जनता दल 2, कांग्रेस (तिवारी) 2, समता पार्टी 1, निर्दलीय 1
बिहारजनता दल 22, भाजपा 18, समता पार्टी 6, भाकपा 3, कांग्रेस 2, सपा 1, झामुमो 1, निर्दलीय 1
महाराष्ट्रभाजपा 18, शिवसेना 15, कांग्रेस 15
आंध्र प्रदेशकांग्रेस 22, तेलुगु देशम 16, भाकपा 2, माकपा 1, एमआईएम 1
पश्चिम बंगालमाकपा 23, कांग्रेस 9, आरएसपी 4, फॉरवर्ड ब्लॉक 3, भाकपा 3
मध्य प्रदेशभाजपा 27, कांग्रेस 8, बसपा 2, कांग्रेस (तिवारी) 1, मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस 1, निर्दलीय 1
तमिलनाडुतमिल मनीला कांग्रेस 20, डीएमके 17, भाकपा 2
कर्नाटकजनता दल 16, भाजपा 6, कांग्रेस 5, कर्नाटक कांग्रेस पार्टी 1
गुजरातभाजपा 16, कांग्रेस 10
राजस्थानभाजपा 12, कांग्रेस 12, कांग्रेस (तिवारी) 1
ओडिशाकांग्रेस 16, जनता दल 4, समता पार्टी 1
केरलकांग्रेस 7, माकपा 5, भाकपा 2, मुस्लिम लीग 2, जनता दल 1, आरएसपी 1, केरल कांग्रेस (एम) 1, निर्दलीय 1
असमकांग्रेस 5, असम गण परिषद 5, भाजपा 1, माकपा 1, स्वायत्त राज्य मांग समिति 1, निर्दलीय 1
पंजाबअकाली दल 8, बसपा 3, कांग्रेस 2
हरियाणाभाजपा 4, हरियाणा विकास पार्टी 3, कांग्रेस 2, निर्दलीय 1
जम्मू-कश्मीरकांग्रेस 4, भाजपा 1, जनता दल 1

1996 में भाजपा को उत्तर प्रदेश में 52, मध्य प्रदेश में 27, बिहार और महाराष्ट्र में 18-18, गुजरात में 16 तथा राजस्थान में 12 सीटें मिलीं। इन छह राज्यों ने भाजपा की कुल 161 सीटों में से 143 सीटें दीं।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस केवल पाँच सीटें जीत सकी। बिहार में जनता दल को 22 और भाजपा को 18 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस दो सीटों पर सिमट गई।

तमिलनाडु में कांग्रेस और अन्नाद्रमुक गठबंधन एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सका। डीएमके और तमिल मनीला कांग्रेस के गठबंधन ने वाम सहयोगियों के साथ सभी 39 सीटें जीत लीं।

7. ग्यारहवें लोकसभा चुनाव की प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ

1. अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने

भाजपा को 161 सीटें मिलने के बाद राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।

16 मई 1996 को वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। लेकिन भाजपा बहुमत के लिए आवश्यक 272 सांसदों का समर्थन नहीं जुटा सकी। 28 मई को लोकसभा में विश्वास मत पर मतदान होने से पहले ही वाजपेयी ने इस्तीफे की घोषणा कर दी।

2. एच. डी. देवेगौड़ा देश के प्रधानमंत्री बने

भाजपा सरकार के पतन के बाद जनता दल, वाम दलों और विभिन्न क्षेत्रीय दलों ने संयुक्त मोर्चे की सरकार बनाई।

कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा 1 जून 1996 को प्रधानमंत्री बने। कांग्रेस ने सरकार को बाहर से समर्थन दिया।

देवेगौड़ा उस समय लोकसभा के सदस्य नहीं थे। वे बाद में संसद के उच्च सदन, राज्यसभा के सदस्य बने।

3. इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने

कांग्रेस ने अप्रैल 1997 में देवेगौड़ा सरकार से समर्थन वापस लिया। लोकसभा में विश्वास मत हारने के बाद देवेगौड़ा ने पद छोड़ा।

संयुक्त मोर्चे ने नए नेता के रूप में इंद्र कुमार गुजराल को चुना। उन्होंने 21 अप्रैल 1997 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

नवंबर 1997 में कांग्रेस ने गुजराल सरकार से भी समर्थन वापस ले लिया।

4. ज्योति बसु के प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव

संयुक्त मोर्चे की सरकार बनाने की कोशिशों के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सामने आया।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने केंद्र सरकार में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया। बाद में ज्योति बसु ने इस निर्णय को ऐतिहासिक भूल बताया था।

इस प्रकरण ने वामपंथी दलों में सरकार में भागीदारी और बाहर से समर्थन के प्रश्न को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनाया।

5. तमिलनाडु में कांग्रेस और अन्नाद्रमुक की पराजय

1996 में तमिलनाडु की सभी 39 लोकसभा सीटें डीएमके, तमिल मनीला कांग्रेस और वाम सहयोगियों ने जीत लीं।

जी. के. मूपनार ने कांग्रेस के अन्नाद्रमुक से गठबंधन के निर्णय का विरोध करते हुए तमिल मनीला कांग्रेस बनाई थी। इस नए दल को 20 सीटें मिलीं।

इसी वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन विजयी हुआ और एम. करुणानिधि फिर मुख्यमंत्री बने।

8. प्रमुख नेताओं के चुनावी परिणाम

1996 में कई प्रमुख नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम चर्चित रहे।

नेतानिर्वाचन क्षेत्रपरिणाम
अटल बिहारी वाजपेयीलखनऊविजयी — भाजपा
पी. वी. नरसिंह रावबेरहामपुर, ओडिशाविजयी — कांग्रेस
लालकृष्ण आडवाणीगांधीनगरविजयी — भाजपा
मुरली मनोहर जोशीइलाहाबादविजयी — भाजपा
मुलायम सिंह यादवमैनपुरीविजयी — समाजवादी पार्टी
मायावतीअकबरपुरविजयी — बसपा
जॉर्ज फर्नांडिसनालंदाविजयी — समता पार्टी
नीतीश कुमारबाढ़विजयी — समता पार्टी
लालू प्रसाद यादवमधेपुराविजयी — जनता दल

1996 के चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी के राजनीतिक जीवन से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण प्रसंग भी था। जैन हवाला मामले में आरोप सामने आने के बाद उन्होंने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया था। इसलिए ऊपर गांधीनगर में उनकी जीत बताने के बजाय इस अंतर को दर्ज करना आवश्यक है: 1996 में गांधीनगर से भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी विजयी हुए थे। वाजपेयी ने लखनऊ और गांधीनगर दोनों सीटें जीती थीं और बाद में लखनऊ सीट अपने पास रखी।

9. 1996 से 1998 : तीन प्रधानमंत्रियों का राजनीतिक घटनाक्रम

1. 16 मई 1996 — अटल बिहारी वाजपेयी

भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। वाजपेयी प्रधानमंत्री नियुक्त हुए। 2. 28 मई 1996 — वाजपेयी सरकार का इस्तीफा

आवश्यक बहुमत न मिलने पर वाजपेयी ने त्यागपत्र दिया। 3. 1 जून 1996 — एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री

संयुक्त मोर्चे की सरकार कांग्रेस के बाहरी समर्थन से बनी। 4. अप्रैल 1997 — देवेगौड़ा सरकार का पतन

कांग्रेस ने समर्थन वापस लिया। सरकार विश्वास मत हार गई। 5. 21 अप्रैल 1997 — इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री

संयुक्त मोर्चे ने कांग्रेस के समर्थन से नई सरकार बनाई। 6. नवंबर 1997 — कांग्रेस ने समर्थन वापस लिया

जैन आयोग की अंतरिम रिपोर्ट और डीएमके की सरकार में भागीदारी को लेकर विवाद बढ़ा। कांग्रेस ने गुजराल सरकार से समर्थन वापस लिया। 7. दिसंबर 1997 — ग्यारहवीं लोकसभा भंग

राष्ट्रपति ने लोकसभा भंग कर दी। फरवरी–मार्च 1998 में बारहवें लोकसभा चुनाव हुए।

10. दसवें और ग्यारहवें लोकसभा चुनाव की तुलना

राजनीतिक दल1991–921996
कांग्रेस244140
भाजपा120161
जनता दल5946
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी3532
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी1412
तेलुगु देशम1316
बहुजन समाज पार्टी211
समाजवादी पार्टीअस्तित्व में नहीं17
शिवसेना415
समता पार्टीअस्तित्व में नहीं8
तमिल मनीला कांग्रेसअस्तित्व में नहीं20

1996 में भाजपा ने पहली बार कांग्रेस से अधिक लोकसभा सीटें हासिल कीं।

कांग्रेस की सीटें 104 कम हुईं, जबकि भाजपा की 41 बढ़ीं। जनता दल की सीटें 59 से घटकर 46 हो गईं।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, समता पार्टी, शिवसेना और तमिल मनीला कांग्रेस जैसे दलों की संसदीय उपस्थिति महत्वपूर्ण हुई।

11. पहले ग्यारह लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा/जनसंघ का प्रदर्शन

चुनाव वर्षकांग्रेसजनसंघ / भाजपा
1951–523643
19573714
196236114
196728335
197135222
1977154जनता पार्टी में विलय
1980353भाजपा का गठन चुनाव के बाद
1984–854142
198919785
1991–92244120
1996140161

1951–1971 की अंतिम कॉलम में भारतीय जनसंघ के परिणाम हैं। भाजपा का गठन 6 अप्रैल 1980 को हुआ था। 1977 में पूर्व जनसंघ के नेता जनता पार्टी में शामिल थे।

12. ग्यारहवीं लोकसभा के कार्यकाल की प्रमुख घटनाएँ

वर्षघटना
1996भाजपा की पहली केंद्र सरकार और 13 दिन में इस्तीफा
1996संयुक्त मोर्चे की सरकार का गठन
1996एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बने
1997देवेगौड़ा सरकार का पतन
1997इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने
1997गुजराल सिद्धांत विदेश नीति की चर्चा का विषय बना
1997भारत की स्वतंत्रता के पचास वर्ष पूरे हुए
1997जैन आयोग की अंतरिम रिपोर्ट पर राजनीतिक विवाद
दिसंबर 1997ग्यारहवीं लोकसभा भंग
1998बारहवाँ लोकसभा चुनाव

13. मूल प्रामाणिक स्रोत

इस अध्ययन का प्राथमिक दस्तावेज भारत निर्वाचन आयोग की मूल सांख्यिकीय रिपोर्ट है।

भारत निर्वाचन आयोग — 1996, ग्यारहवाँ लोकसभा चुनाव, संपूर्ण सांख्यिकीय रिपोर्ट (PDF)

इस रिपोर्ट में पृष्ठ 1–6 पर राजनीतिक दलों की सूची, पृष्ठ 7–12 पर निर्वाचन क्षेत्रों और उम्मीदवारों का विवरण, पृष्ठ 77–90 पर विजयी उम्मीदवार, पृष्ठ 92–99 पर राज्यवार सीटें तथा पृष्ठ 100–110 पर दलवार राष्ट्रीय मत प्रतिशत दिए गए हैं।

सरकार गठन और राजनीतिक घटनाक्रम के लिए अंतर-संसदीय संघ — भारत के 1996 चुनाव का ऐतिहासिक विवरण उपयोगी है।

14. ऐतिहासिक निष्कर्ष

1996 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति में तीन महत्वपूर्ण परिवर्तनों का प्रतीक था।

पहला, भाजपा 161 सीटें जीतकर पहली बार देश की सबसे बड़ी संसदीय पार्टी बनी। दूसरा, कांग्रेस 140 सीटों पर सिमट गई। तीसरा, क्षेत्रीय दलों और वामपंथी दलों के सहयोग से संयुक्त मोर्चे की सरकार बनी।

देश में केंद्र सरकार के गठन के लिए अब केवल सबसे बड़ी पार्टी होना पर्याप्त नहीं था। संसदीय बहुमत जुटाने के लिए कई दलों का समर्थन आवश्यक हो गया था।

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ग्यारहवीं लोकसभा में किसी एक दल को बहुमत नहीं मिला। परिणामस्वरूप अटल बिहारी वाजपेयी, एच. डी. देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल—तीनों एक ही लोकसभा के कार्यकाल में प्रधानमंत्री बने।

ग्यारहवीं लोकसभा दिसंबर 1997 में भंग हुई और 1998 में बारहवें आम चुनाव हुए, जिनके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में नई गठबंधन सरकार बनी।

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स्रोत

निर्वाचन आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टें · संकलन और तालिका-सुधार की टिप्पणी