भारत का ग्यारहवाँ लोकसभा चुनाव 1996 : भाजपा पहली बार सबसे बड़ी पार्टी, वाजपेयी की 13 दिन की सरकार और संयुक्त मोर्चे का दौर
राज्यवार सीटें, दलवार नतीजे और मत प्रतिशत, प्रमुख नेता तथा चुनावी घटनाक्रम
अध्याय-सूची और डाउनलोड खोलें
भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — ग्यारहवाँ अध्याय
भारत का ग्यारहवाँ लोकसभा आम चुनाव अप्रैल–मई 1996 में हुआ। यह चुनाव भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। 1991 में कांग्रेस के नेतृत्व में बनी पी. वी. नरसिंह राव की सरकार ने अपना पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा किया, लेकिन 1996 के चुनाव में कांग्रेस की सीटें घटकर 140 रह गईं।
भारतीय जनता पार्टी 161 सीटों के साथ पहली बार लोकसभा की सबसे बड़ी पार्टी बनी। राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। वाजपेयी ने 16 मई 1996 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन आवश्यक बहुमत न जुटा पाने के कारण 28 मई को इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद जनता दल, वामपंथी और क्षेत्रीय दलों के संयुक्त मोर्चे ने कांग्रेस के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई। 1 जून 1996 को एच. डी. देवेगौड़ा और 21 अप्रैल 1997 को इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने।
इस प्रकार ग्यारहवीं लोकसभा के लगभग दो वर्ष के कार्यकाल में तीन प्रधानमंत्री रहे।
- कुल निर्वाचित सीटें
- 543
- भाजपा की सीटें
- 161
- कांग्रेस की सीटें
- 140
- जनता दल की सीटें
- 46
1. ग्यारहवें लोकसभा चुनाव के प्रमुख आँकड़े
| विषय | विवरण |
|---|---|
| चुनाव वर्ष | 1996 |
| मुख्य चुनाव अवधि | 27 अप्रैल से मई 1996 |
| कुछ क्षेत्रों में मतदान | 30 मई तक |
| कुल निर्वाचित सीटें | 543 |
| बहुमत का आँकड़ा | 272 |
| सामान्य सीटें | 423 |
| अनुसूचित जाति आरक्षित | 79 |
| अनुसूचित जनजाति आरक्षित | 41 |
| पंजीकृत मतदाता | 59,25,72,288 |
| मतदान करने वाले | 34,33,08,035 |
| मतदान प्रतिशत | 57.94% |
| कुल वैध मत | 33,48,73,286 |
| कुल उम्मीदवार | 13,952 |
| निर्वाचित महिला सांसद | 39 |
| मुख्य निर्वाचन आयुक्त | टी. एन. शेषन |
| सबसे बड़ी पार्टी | भाजपा — 161 |
| दूसरे स्थान पर | कांग्रेस — 140 |
| तीसरे स्थान पर | जनता दल — 46 |
| चौथे स्थान पर | मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी — 32 |
निर्वाचन आयोग के अनुसार 1996 में पहली बार एक ही लोकसभा चुनाव में लगभग 14 हजार उम्मीदवार मैदान में उतरे। इनमें 10,636 निर्दलीय उम्मीदवार थे। केवल नौ निर्दलीय जीत पाए।
इन चुनावों में सभी 543 निर्वाचित सीटों के परिणाम दर्ज हुए।
2. 1996 के चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि
1991 से 1996 तक पी. वी. नरसिंह राव की सरकार सत्ता में रही। इस अवधि में देश में आर्थिक उदारीकरण, अयोध्या विवाद, राजनीतिक दलों के पुनर्गठन और भ्रष्टाचार के कई आरोपों से जुड़े विवाद सामने आए।
प्रमुख घटनाओं की समयरेखा
1. 1991 — नरसिंह राव सरकार और आर्थिक उदारीकरण
डॉ. मनमोहन सिंह वित्त मंत्री बने। औद्योगिक लाइसेंस, विदेशी निवेश, व्यापार और आर्थिक नीतियों में परिवर्तन शुरू हुए। 2. 6 दिसंबर 1992 — अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद का विध्वंस
इस घटना ने राष्ट्रीय राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों पर व्यापक प्रभाव डाला। इसके बाद भाजपा शासित चार राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश—की सरकारें बर्खास्त की गईं। 3. 1993 — नरसिंह राव सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव
सरकार ने विश्वास मत जीता। बाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा सांसदों को कथित रिश्वत देने से संबंधित प्रकरण सामने आया, जिसने व्यापक विवाद उत्पन्न किया। 4. 1995 — कांग्रेस के भीतर विभाजन
अर्जुन सिंह और एन. डी. तिवारी सहित कुछ नेताओं ने कांग्रेस से अलग होकर ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) का गठन किया। 5. मार्च–अप्रैल 1996 — चुनावी अभियान
भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व और कांग्रेस ने पी. वी. नरसिंह राव के नेतृत्व में चुनाव लड़ा। जनता दल, वाम दल तथा कई क्षेत्रीय दल अलग-अलग गठबंधनों के साथ मैदान में उतरे। 6. मई 1996 — खंडित जनादेश
किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। भाजपा 161 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी।
1996 तक राष्ट्रीय राजनीति दो प्रमुख दलों तक सीमित नहीं रह गई थी। क्षेत्रीय दलों का समर्थन केंद्र में सरकार बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुका था।
3. चुनाव मैदान में प्रमुख राजनीतिक दल और उनके नेता
| राजनीतिक दल | प्रमुख नेता |
|---|---|
| भारतीय जनता पार्टी | अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | पी. वी. नरसिंह राव |
| जनता दल | एच. डी. देवेगौड़ा, लालू प्रसाद यादव, शरद यादव |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | हरकिशन सिंह सुरजीत, ज्योति बसु |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | इंद्रजीत गुप्त, ए. बी. बर्धन |
| तमिल मनीला कांग्रेस | जी. के. मूपनार, पी. चिदंबरम |
| समाजवादी पार्टी | मुलायम सिंह यादव |
| बहुजन समाज पार्टी | कांशीराम, मायावती |
| डीएमके | एम. करुणानिधि |
| तेलुगु देशम पार्टी | एन. चंद्रबाबू नायडू |
| शिवसेना | बाल ठाकरे, मनोहर जोशी |
| समता पार्टी | जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार |
| शिरोमणि अकाली दल | प्रकाश सिंह बादल |
| असम गण परिषद | प्रफुल्ल कुमार महंत |
| ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) | एन. डी. तिवारी, अर्जुन सिंह |
| हरियाणा विकास पार्टी | बंसीलाल |
| झारखंड मुक्ति मोर्चा | शिबू सोरेन |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | त्रिदीब चौधरी |
| ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक | चित्त बसु |
| इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग | ई. अहमद, जी. एम. बनातवाला |
| अन्नाद्रमुक | जे. जयललिता |
| केरल कांग्रेस (एम) | के. एम. मणि |
यह सूची औपचारिक पार्टी अध्यक्षों के साथ उन नेताओं को भी शामिल करती है जो संगठन, प्रचार या संसदीय राजनीति में प्रभावशाली थे।
दो विशेष बातें: समाजवादी पार्टी का गठन मुलायम सिंह यादव ने 1992 में किया था। इसलिए 1996 उसके लिए पहला लोकसभा आम चुनाव था। तमिल मनीला कांग्रेस भी 1996 में जी. के. मूपनार द्वारा कांग्रेस से अलग होकर बनाई गई थी।
4. किस पार्टी को कितनी सीटें और कितना वोट प्रतिशत मिला?
1996 में कांग्रेस को भाजपा से अधिक वोट मिले, लेकिन भाजपा ने उससे 21 सीटें ज्यादा जीत लीं। भाजपा 161 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि कांग्रेस 140 सीटों पर रही।
नीचे सभी प्रमुख सीट-विजेता दलों के आधिकारिक परिणाम दिए गए हैं।
| राजनीतिक दल | सीटें | राष्ट्रीय वोट शेयर |
|---|---|---|
| भारतीय जनता पार्टी | 161 | 20.29% |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 140 | 28.80% |
| जनता दल | 46 | 8.08% |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 32 | 6.12% |
| तमिल मनीला कांग्रेस | 20 | 2.19% |
| समाजवादी पार्टी | 17 | 3.28% |
| डीएमके | 17 | 2.14% |
| तेलुगु देशम पार्टी | 16 | 2.97% |
| शिवसेना | 15 | 1.49% |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 12 | 1.97% |
| बहुजन समाज पार्टी | 11 | 4.02% |
| समता पार्टी | 8 | 2.17% |
| शिरोमणि अकाली दल | 8 | 0.76% |
| असम गण परिषद | 5 | 0.76% |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | 5 | 0.63% |
| ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) | 4 | 1.46% |
| फॉरवर्ड ब्लॉक | 3 | 0.38% |
| हरियाणा विकास पार्टी | 3 | 0.35% |
| मुस्लिम लीग | 2 | 0.23% |
| झारखंड मुक्ति मोर्चा | 1 | 0.38% |
| कर्नाटक कांग्रेस पार्टी | 1 | 0.17% |
| केरल कांग्रेस (एम) | 1 | 0.11% |
| एमआईएम | 1 | 0.10% |
| मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस | 1 | लगभग 0.10% |
| स्वायत्त राज्य मांग समिति | 1 | 0.05% |
| महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी | 1 | 0.04% |
| सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट | 1 | 0.04% |
| यूनाइटेड गोअन्स डेमोक्रेटिक पार्टी | 1 | 0.03% |
| निर्दलीय | 9 | 6.28% |
| कुल निर्वाचित सीटें | 543 |
ये पूरे भारत के वैध मतों पर आधारित प्रतिशत हैं, न कि केवल प्रत्येक दल द्वारा लड़ी गई सीटों के प्रतिशत। शून्य सीट पाने वाले दलों के मत भी राष्ट्रीय गणना में हैं, इसलिए तालिका के प्रतिशतों का योग 100 नहीं है। स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, 1996, खंड I, पृष्ठ 100–110।
मत प्रतिशत और सीटों का उल्लेखनीय अंतर
कांग्रेस को 28.80 प्रतिशत वोट मिले, जबकि भाजपा को 20.29 प्रतिशत। अर्थात कांग्रेस को भाजपा से 8.51 प्रतिशत अंक अधिक वोट मिले। इसके बावजूद भाजपा की 161 और कांग्रेस की 140 सीटें रहीं।
इसका कारण विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में मतों का अलग-अलग वितरण था। किसी दल का राष्ट्रीय मत प्रतिशत अधिक होने से यह आवश्यक नहीं कि उसे सबसे अधिक सीटें भी मिलें।
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह थी कि बसपा को 4.02 प्रतिशत राष्ट्रीय मत मिले, लेकिन केवल 11 सीटें। इसके विपरीत तमिल मनीला कांग्रेस को 2.19 प्रतिशत मतों पर 20 सीटें मिलीं। तमिल मनीला कांग्रेस ने अपना चुनाव सीमित क्षेत्रों में केंद्रित रखा था।
5. राज्यवार लोकसभा सीटें : किस राज्य में कौन जीता?
1996 में वर्तमान झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड अलग राज्य नहीं बने थे। बिहार में झारखंड का क्षेत्र, मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में वर्तमान उत्तराखंड का क्षेत्र शामिल था।
नीचे तत्कालीन सभी 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का चुनाव परिणाम दिया गया है।
| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | कुल सीटें | कांग्रेस | भाजपा | अन्य |
|---|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 85 | 5 | 52 | 28 |
| बिहार | 54 | 2 | 18 | 34 |
| महाराष्ट्र | 48 | 15 | 18 | 15 |
| आंध्र प्रदेश | 42 | 22 | 0 | 20 |
| पश्चिम बंगाल | 42 | 9 | 0 | 33 |
| मध्य प्रदेश | 40 | 8 | 27 | 5 |
| तमिलनाडु | 39 | 0 | 0 | 39 |
| कर्नाटक | 28 | 5 | 6 | 17 |
| गुजरात | 26 | 10 | 16 | 0 |
| राजस्थान | 25 | 12 | 12 | 1 |
| ओडिशा | 21 | 16 | 0 | 5 |
| केरल | 20 | 7 | 0 | 13 |
| असम | 14 | 5 | 1 | 8 |
| पंजाब | 13 | 2 | 0 | 11 |
| हरियाणा | 10 | 2 | 4 | 4 |
| दिल्ली | 7 | 2 | 5 | 0 |
| जम्मू-कश्मीर | 6 | 4 | 1 | 1 |
| हिमाचल प्रदेश | 4 | 4 | 0 | 0 |
| अरुणाचल प्रदेश | 2 | 0 | 0 | 2 |
| गोवा | 2 | 0 | 0 | 2 |
| मणिपुर | 2 | 2 | 0 | 0 |
| मेघालय | 2 | 1 | 0 | 1 |
| त्रिपुरा | 2 | 0 | 0 | 2 |
| मिजोरम | 1 | 1 | 0 | 0 |
| नगालैंड | 1 | 1 | 0 | 0 |
| सिक्किम | 1 | 0 | 0 | 1 |
| अंडमान-निकोबार | 1 | 1 | 0 | 0 |
| चंडीगढ़ | 1 | 0 | 1 | 0 |
| दादरा-नगर हवेली | 1 | 1 | 0 | 0 |
| दमन और दीव | 1 | 1 | 0 | 0 |
| लक्षद्वीप | 1 | 1 | 0 | 0 |
| पांडिचेरी (पुडुचेरी) | 1 | 1 | 0 | 0 |
| कुल | 543 | 140 | 161 | 242 |
मूल स्रोत: निर्वाचन आयोग की 1996 सांख्यिकीय रिपोर्ट, पृष्ठ 96–99, राज्यवार दलों की विजयी सीटें।
6. प्रमुख राज्यों में अन्य दलों को कितनी सीटें मिलीं?
| राज्य | प्रमुख दलवार परिणाम |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | भाजपा 52, समाजवादी पार्टी 16, बसपा 6, कांग्रेस 5, जनता दल 2, कांग्रेस (तिवारी) 2, समता पार्टी 1, निर्दलीय 1 |
| बिहार | जनता दल 22, भाजपा 18, समता पार्टी 6, भाकपा 3, कांग्रेस 2, सपा 1, झामुमो 1, निर्दलीय 1 |
| महाराष्ट्र | भाजपा 18, शिवसेना 15, कांग्रेस 15 |
| आंध्र प्रदेश | कांग्रेस 22, तेलुगु देशम 16, भाकपा 2, माकपा 1, एमआईएम 1 |
| पश्चिम बंगाल | माकपा 23, कांग्रेस 9, आरएसपी 4, फॉरवर्ड ब्लॉक 3, भाकपा 3 |
| मध्य प्रदेश | भाजपा 27, कांग्रेस 8, बसपा 2, कांग्रेस (तिवारी) 1, मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस 1, निर्दलीय 1 |
| तमिलनाडु | तमिल मनीला कांग्रेस 20, डीएमके 17, भाकपा 2 |
| कर्नाटक | जनता दल 16, भाजपा 6, कांग्रेस 5, कर्नाटक कांग्रेस पार्टी 1 |
| गुजरात | भाजपा 16, कांग्रेस 10 |
| राजस्थान | भाजपा 12, कांग्रेस 12, कांग्रेस (तिवारी) 1 |
| ओडिशा | कांग्रेस 16, जनता दल 4, समता पार्टी 1 |
| केरल | कांग्रेस 7, माकपा 5, भाकपा 2, मुस्लिम लीग 2, जनता दल 1, आरएसपी 1, केरल कांग्रेस (एम) 1, निर्दलीय 1 |
| असम | कांग्रेस 5, असम गण परिषद 5, भाजपा 1, माकपा 1, स्वायत्त राज्य मांग समिति 1, निर्दलीय 1 |
| पंजाब | अकाली दल 8, बसपा 3, कांग्रेस 2 |
| हरियाणा | भाजपा 4, हरियाणा विकास पार्टी 3, कांग्रेस 2, निर्दलीय 1 |
| जम्मू-कश्मीर | कांग्रेस 4, भाजपा 1, जनता दल 1 |
1996 में भाजपा को उत्तर प्रदेश में 52, मध्य प्रदेश में 27, बिहार और महाराष्ट्र में 18-18, गुजरात में 16 तथा राजस्थान में 12 सीटें मिलीं। इन छह राज्यों ने भाजपा की कुल 161 सीटों में से 143 सीटें दीं।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस केवल पाँच सीटें जीत सकी। बिहार में जनता दल को 22 और भाजपा को 18 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस दो सीटों पर सिमट गई।
तमिलनाडु में कांग्रेस और अन्नाद्रमुक गठबंधन एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सका। डीएमके और तमिल मनीला कांग्रेस के गठबंधन ने वाम सहयोगियों के साथ सभी 39 सीटें जीत लीं।
7. ग्यारहवें लोकसभा चुनाव की प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ
1. अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने
भाजपा को 161 सीटें मिलने के बाद राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।
16 मई 1996 को वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। लेकिन भाजपा बहुमत के लिए आवश्यक 272 सांसदों का समर्थन नहीं जुटा सकी। 28 मई को लोकसभा में विश्वास मत पर मतदान होने से पहले ही वाजपेयी ने इस्तीफे की घोषणा कर दी।
2. एच. डी. देवेगौड़ा देश के प्रधानमंत्री बने
भाजपा सरकार के पतन के बाद जनता दल, वाम दलों और विभिन्न क्षेत्रीय दलों ने संयुक्त मोर्चे की सरकार बनाई।
कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा 1 जून 1996 को प्रधानमंत्री बने। कांग्रेस ने सरकार को बाहर से समर्थन दिया।
देवेगौड़ा उस समय लोकसभा के सदस्य नहीं थे। वे बाद में संसद के उच्च सदन, राज्यसभा के सदस्य बने।
3. इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने
कांग्रेस ने अप्रैल 1997 में देवेगौड़ा सरकार से समर्थन वापस लिया। लोकसभा में विश्वास मत हारने के बाद देवेगौड़ा ने पद छोड़ा।
संयुक्त मोर्चे ने नए नेता के रूप में इंद्र कुमार गुजराल को चुना। उन्होंने 21 अप्रैल 1997 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
नवंबर 1997 में कांग्रेस ने गुजराल सरकार से भी समर्थन वापस ले लिया।
4. ज्योति बसु के प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव
संयुक्त मोर्चे की सरकार बनाने की कोशिशों के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सामने आया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने केंद्र सरकार में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया। बाद में ज्योति बसु ने इस निर्णय को ऐतिहासिक भूल बताया था।
इस प्रकरण ने वामपंथी दलों में सरकार में भागीदारी और बाहर से समर्थन के प्रश्न को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनाया।
5. तमिलनाडु में कांग्रेस और अन्नाद्रमुक की पराजय
1996 में तमिलनाडु की सभी 39 लोकसभा सीटें डीएमके, तमिल मनीला कांग्रेस और वाम सहयोगियों ने जीत लीं।
जी. के. मूपनार ने कांग्रेस के अन्नाद्रमुक से गठबंधन के निर्णय का विरोध करते हुए तमिल मनीला कांग्रेस बनाई थी। इस नए दल को 20 सीटें मिलीं।
इसी वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन विजयी हुआ और एम. करुणानिधि फिर मुख्यमंत्री बने।
8. प्रमुख नेताओं के चुनावी परिणाम
1996 में कई प्रमुख नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम चर्चित रहे।
| नेता | निर्वाचन क्षेत्र | परिणाम |
|---|---|---|
| अटल बिहारी वाजपेयी | लखनऊ | विजयी — भाजपा |
| पी. वी. नरसिंह राव | बेरहामपुर, ओडिशा | विजयी — कांग्रेस |
| लालकृष्ण आडवाणी | गांधीनगर | विजयी — भाजपा |
| मुरली मनोहर जोशी | इलाहाबाद | विजयी — भाजपा |
| मुलायम सिंह यादव | मैनपुरी | विजयी — समाजवादी पार्टी |
| मायावती | अकबरपुर | विजयी — बसपा |
| जॉर्ज फर्नांडिस | नालंदा | विजयी — समता पार्टी |
| नीतीश कुमार | बाढ़ | विजयी — समता पार्टी |
| लालू प्रसाद यादव | मधेपुरा | विजयी — जनता दल |
1996 के चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी के राजनीतिक जीवन से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण प्रसंग भी था। जैन हवाला मामले में आरोप सामने आने के बाद उन्होंने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया था। इसलिए ऊपर गांधीनगर में उनकी जीत बताने के बजाय इस अंतर को दर्ज करना आवश्यक है: 1996 में गांधीनगर से भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी विजयी हुए थे। वाजपेयी ने लखनऊ और गांधीनगर दोनों सीटें जीती थीं और बाद में लखनऊ सीट अपने पास रखी।
9. 1996 से 1998 : तीन प्रधानमंत्रियों का राजनीतिक घटनाक्रम
1. 16 मई 1996 — अटल बिहारी वाजपेयी
भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। वाजपेयी प्रधानमंत्री नियुक्त हुए। 2. 28 मई 1996 — वाजपेयी सरकार का इस्तीफा
आवश्यक बहुमत न मिलने पर वाजपेयी ने त्यागपत्र दिया। 3. 1 जून 1996 — एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री
संयुक्त मोर्चे की सरकार कांग्रेस के बाहरी समर्थन से बनी। 4. अप्रैल 1997 — देवेगौड़ा सरकार का पतन
कांग्रेस ने समर्थन वापस लिया। सरकार विश्वास मत हार गई। 5. 21 अप्रैल 1997 — इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री
संयुक्त मोर्चे ने कांग्रेस के समर्थन से नई सरकार बनाई। 6. नवंबर 1997 — कांग्रेस ने समर्थन वापस लिया
जैन आयोग की अंतरिम रिपोर्ट और डीएमके की सरकार में भागीदारी को लेकर विवाद बढ़ा। कांग्रेस ने गुजराल सरकार से समर्थन वापस लिया। 7. दिसंबर 1997 — ग्यारहवीं लोकसभा भंग
राष्ट्रपति ने लोकसभा भंग कर दी। फरवरी–मार्च 1998 में बारहवें लोकसभा चुनाव हुए।
10. दसवें और ग्यारहवें लोकसभा चुनाव की तुलना
| राजनीतिक दल | 1991–92 | 1996 |
|---|---|---|
| कांग्रेस | 244 | 140 |
| भाजपा | 120 | 161 |
| जनता दल | 59 | 46 |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 35 | 32 |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 14 | 12 |
| तेलुगु देशम | 13 | 16 |
| बहुजन समाज पार्टी | 2 | 11 |
| समाजवादी पार्टी | अस्तित्व में नहीं | 17 |
| शिवसेना | 4 | 15 |
| समता पार्टी | अस्तित्व में नहीं | 8 |
| तमिल मनीला कांग्रेस | अस्तित्व में नहीं | 20 |
1996 में भाजपा ने पहली बार कांग्रेस से अधिक लोकसभा सीटें हासिल कीं।
कांग्रेस की सीटें 104 कम हुईं, जबकि भाजपा की 41 बढ़ीं। जनता दल की सीटें 59 से घटकर 46 हो गईं।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, समता पार्टी, शिवसेना और तमिल मनीला कांग्रेस जैसे दलों की संसदीय उपस्थिति महत्वपूर्ण हुई।
11. पहले ग्यारह लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा/जनसंघ का प्रदर्शन
| चुनाव वर्ष | कांग्रेस | जनसंघ / भाजपा |
|---|---|---|
| 1951–52 | 364 | 3 |
| 1957 | 371 | 4 |
| 1962 | 361 | 14 |
| 1967 | 283 | 35 |
| 1971 | 352 | 22 |
| 1977 | 154 | जनता पार्टी में विलय |
| 1980 | 353 | भाजपा का गठन चुनाव के बाद |
| 1984–85 | 414 | 2 |
| 1989 | 197 | 85 |
| 1991–92 | 244 | 120 |
| 1996 | 140 | 161 |
1951–1971 की अंतिम कॉलम में भारतीय जनसंघ के परिणाम हैं। भाजपा का गठन 6 अप्रैल 1980 को हुआ था। 1977 में पूर्व जनसंघ के नेता जनता पार्टी में शामिल थे।
12. ग्यारहवीं लोकसभा के कार्यकाल की प्रमुख घटनाएँ
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1996 | भाजपा की पहली केंद्र सरकार और 13 दिन में इस्तीफा |
| 1996 | संयुक्त मोर्चे की सरकार का गठन |
| 1996 | एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बने |
| 1997 | देवेगौड़ा सरकार का पतन |
| 1997 | इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने |
| 1997 | गुजराल सिद्धांत विदेश नीति की चर्चा का विषय बना |
| 1997 | भारत की स्वतंत्रता के पचास वर्ष पूरे हुए |
| 1997 | जैन आयोग की अंतरिम रिपोर्ट पर राजनीतिक विवाद |
| दिसंबर 1997 | ग्यारहवीं लोकसभा भंग |
| 1998 | बारहवाँ लोकसभा चुनाव |
13. मूल प्रामाणिक स्रोत
इस अध्ययन का प्राथमिक दस्तावेज भारत निर्वाचन आयोग की मूल सांख्यिकीय रिपोर्ट है।
भारत निर्वाचन आयोग — 1996, ग्यारहवाँ लोकसभा चुनाव, संपूर्ण सांख्यिकीय रिपोर्ट (PDF)
इस रिपोर्ट में पृष्ठ 1–6 पर राजनीतिक दलों की सूची, पृष्ठ 7–12 पर निर्वाचन क्षेत्रों और उम्मीदवारों का विवरण, पृष्ठ 77–90 पर विजयी उम्मीदवार, पृष्ठ 92–99 पर राज्यवार सीटें तथा पृष्ठ 100–110 पर दलवार राष्ट्रीय मत प्रतिशत दिए गए हैं।
सरकार गठन और राजनीतिक घटनाक्रम के लिए अंतर-संसदीय संघ — भारत के 1996 चुनाव का ऐतिहासिक विवरण उपयोगी है।
14. ऐतिहासिक निष्कर्ष
1996 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति में तीन महत्वपूर्ण परिवर्तनों का प्रतीक था।
पहला, भाजपा 161 सीटें जीतकर पहली बार देश की सबसे बड़ी संसदीय पार्टी बनी। दूसरा, कांग्रेस 140 सीटों पर सिमट गई। तीसरा, क्षेत्रीय दलों और वामपंथी दलों के सहयोग से संयुक्त मोर्चे की सरकार बनी।
देश में केंद्र सरकार के गठन के लिए अब केवल सबसे बड़ी पार्टी होना पर्याप्त नहीं था। संसदीय बहुमत जुटाने के लिए कई दलों का समर्थन आवश्यक हो गया था।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ग्यारहवीं लोकसभा में किसी एक दल को बहुमत नहीं मिला। परिणामस्वरूप अटल बिहारी वाजपेयी, एच. डी. देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल—तीनों एक ही लोकसभा के कार्यकाल में प्रधानमंत्री बने।
ग्यारहवीं लोकसभा दिसंबर 1997 में भंग हुई और 1998 में बारहवें आम चुनाव हुए, जिनके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में नई गठबंधन सरकार बनी।
स्रोत
निर्वाचन आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टें · संकलन और तालिका-सुधार की टिप्पणी