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OCN Research Desk · भारतीय संसदीय लोकतंत्र

भारत का पहला लोकसभा चुनाव 1951–52 : विस्तृत चुनावी इतिहास

राज्यवार सीटें, दलवार नतीजे और मत प्रतिशत, प्रमुख नेता तथा चुनावी घटनाक्रम

ओमकार चौधरी / OCN Research Deskस्वतंत्र शोध अध्याय · 27 अक्टूबर 2026
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भारत के पहले आम चुनाव में 489 लोकसभा सीटों के लिए मतदान हुआ। कांग्रेस ने 364 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में सरकार बनी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 सीटों के साथ सबसे बड़ा विपक्षी दल बनी, जबकि समाजवादी पार्टी को 12 और किसान मजदूर प्रजा पार्टी को 9 सीटें मिलीं।

यह चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक था कि स्वतंत्र भारत में पहली बार सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर देशव्यापी मतदान आयोजित किया गया।

निर्वाचित लोकसभा सीटें
489
कांग्रेस की जीत
364
कांग्रेस का मत प्रतिशत
44.99%
चुनाव में भाग लेने वाले दल
53

1. किस राज्य में कितनी लोकसभा सीटें थीं?

1951–52 में भारत का राजनीतिक मानचित्र आज जैसा नहीं था। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का वर्तमान स्वरूप तब अस्तित्व में नहीं था। हैदराबाद, मध्य भारत, सौराष्ट्र, विंध्य प्रदेश, भोपाल और पटियाला एवं पूर्वी पंजाब राज्य संघ जैसी अलग प्रशासनिक इकाइयाँ थीं।

नीचे उस समय की सभी 26 चुनावी प्रशासनिक इकाइयों की सीटें दी गई हैं।

क्रमतत्कालीन राज्य / क्षेत्रलोकसभा सीटें
1उत्तर प्रदेश86
2मद्रास75
3बिहार55
4बंबई45
5पश्चिम बंगाल34
6मध्य प्रदेश29
7हैदराबाद25
8उड़ीसा (अब ओडिशा)20
9राजस्थान20
10पंजाब18
11असम12
12त्रावणकोर-कोचीन12
13मध्य भारत11
14मैसूर11
15सौराष्ट्र6
16विंध्य प्रदेश6
17पटियाला एवं पूर्वी पंजाब राज्य संघ (PEPSU)5
18दिल्ली4
19हिमाचल प्रदेश3
20अजमेर2
21भोपाल2
22कच्छ2
23मणिपुर2
24त्रिपुरा2
25बिलासपुर1
26कुर्ग1
कुल489

जम्मू-कश्मीर में इस चुनाव के अंतर्गत प्रत्यक्ष मतदान नहीं हुआ था। उसके छह प्रतिनिधियों का चयन अलग व्यवस्था के अंतर्गत हुआ था, इसलिए वे 489 निर्वाचित सीटों में शामिल नहीं हैं।

एक महत्वपूर्ण व्यवस्था यह भी थी कि अनेक संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों से दो सांसद चुने जाते थे। पश्चिम बंगाल में तीन सदस्य वाला एक निर्वाचन क्षेत्र भी था। इसीलिए 489 सीटों की संख्या और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या समान नहीं थी।

2. कौन-कौन सी पार्टियाँ चुनाव मैदान में थीं और उनके नेता कौन थे?

निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कुल 53 राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार उतारे। इनमें राष्ट्रीय स्तर के बड़े दलों के अलावा अनेक क्षेत्रीय, किसान, समाजवादी, वामपंथी तथा सामाजिक संगठनों पर आधारित दल शामिल थे।

प्रमुख दल और उनसे जुड़े तत्कालीन नेता इस प्रकार थे:

राजनीतिक दलप्रमुख नेता / संस्थापक
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसजवाहरलाल नेहरू
सोशलिस्ट पार्टीजयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया
किसान मजदूर प्रजा पार्टीआचार्य जे. बी. कृपलानी
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टीअजय घोष
भारतीय जनसंघडॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशनडॉ. भीमराव आंबेडकर
अखिल भारतीय राम राज्य परिषदस्वामी करपात्री महाराज
अखिल भारतीय हिंदू महासभाएन. सी. चटर्जी सहित तत्कालीन नेतृत्व
शिरोमणि अकाली दलमास्टर तारा सिंह
झारखंड पार्टीजयपाल सिंह मुंडा
गणतंत्र परिषद (उड़ीसा)राजेंद्र नारायण सिंह देव
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टीत्रिदीब चौधरी
कृषिकर लोक पार्टीएन. जी. रंगा
पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टीकेशवराव जेधे एवं अन्य किसान नेता
पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (हैदराबाद)रवि नारायण रेड्डी सहित वामपंथी नेता

यहाँ संस्थापक, प्रमुख प्रचारक और तत्कालीन संगठनात्मक नेता का अंतर ध्यान में रखना चाहिए। सभी दलों ने प्रधानमंत्री पद के औपचारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किए थे।

3. किस पार्टी को कितनी सीटें और कितना वोट प्रतिशत मिला?

नीचे सभी सीट जीतने वाले दलों का परिणाम दिया गया है। मतदान प्रतिशत पूरे देश में मिले वैध मतों का हिस्सा है, जबकि सीटें प्रत्यक्ष चुनाव में जीती गई हैं।

राजनीतिक दलसीटेंवोट शेयर
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस36444.99%
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी163.29%
सोशलिस्ट पार्टी1210.59%
किसान मजदूर प्रजा पार्टी95.79%
पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट71.29%
अखिल भारतीय गणतंत्र परिषद60.91%
हिंदू महासभा40.95%
शिरोमणि अकाली दल40.99%
तमिलनाडु टॉयलर्स पार्टी40.84%
भारतीय जनसंघ33.06%
राम राज्य परिषद31.97%
झारखंड पार्टी30.71%
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी30.44%
कॉमनवील पार्टी30.31%
शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन22.38%
पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी20.94%
लोक सेवक संघ20.29%
फॉरवर्ड ब्लॉक (मार्क्सवादी समूह)10.91%
कृषिकर लोक पार्टी11.41%
छोटानागपुर संथाल परगना जनता पार्टी10.22%
त्रावणकोर तमिलनाडु कांग्रेस10.11%
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग10.08%
निर्दलीय उम्मीदवार3715.90%

स्रोत: निर्वाचन आयोग, 1951 लोकसभा आम चुनाव की राष्ट्रीय दलवार सांख्यिकीय रिपोर्ट।

इस परिणाम के तीन उल्लेखनीय तथ्य

पहला: कांग्रेस को लगभग 45 प्रतिशत वोट मिले, लेकिन उसने लोकसभा की करीब 74.4 प्रतिशत निर्वाचित सीटें जीत लीं।

दूसरा: सोशलिस्ट पार्टी को 10.59 प्रतिशत मत मिलने के बावजूद केवल 12 सीटें मिलीं। कम्युनिस्ट पार्टी को 3.29 प्रतिशत वोट पर 16 सीटें हासिल हुईं। इससे स्पष्ट होता है कि किसी दल के मत कितने भौगोलिक रूप से केंद्रित हैं, इसका सीटों पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है।

तीसरा: डॉ. आंबेडकर के नेतृत्व वाली शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन को 2.38 प्रतिशत वोट और दो सीटें मिलीं। भारतीय जनसंघ ने अपने पहले लोकसभा चुनाव में तीन सीटें हासिल कीं।

4. कुछ प्रमुख राज्यों में परिणाम

तत्कालीन राज्यकांग्रेस की सीटेंअन्य महत्वपूर्ण परिणाम
उत्तर प्रदेश (86)81सोशलिस्ट 2, हिंदू महासभा 1, निर्दलीय 2
मद्रास (75)35कम्युनिस्ट 8, किसान मजदूर प्रजा पार्टी 6, निर्दलीय 15 सहित अन्य दल
बिहार (55)45सोशलिस्ट 3, झारखंड पार्टी 3 सहित अन्य
बंबई (45)40निर्दलीय 3, शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन 1, पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी 1
पश्चिम बंगाल (34)24कम्युनिस्ट 5, जनसंघ 2 सहित अन्य
मध्य प्रदेश (29)27निर्दलीय 2
हैदराबाद (25)14पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट 7 सहित अन्य
उड़ीसा (20)11गणतंत्र परिषद 6 सहित अन्य
पंजाब (18)16अकाली दल 2
त्रिपुरा (2)0कम्युनिस्ट पार्टी 2

5. चुनाव से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएँ

जवाहरलाल नेहरू का देशव्यापी चुनाव अभियान

नेहरू कांग्रेस के सबसे प्रमुख प्रचारक थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत, राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र और विकास के सवालों को चुनाव प्रचार के केंद्र में रखा।

डॉ. भीमराव आंबेडकर की पराजय

आंबेडकर बंबई उत्तर-मध्य निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हार गए। यह पहले चुनाव के सबसे चर्चित परिणामों में से एक था।

सुकुमार सेन का चुनाव प्रबंधन

भारत के प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन के नेतृत्व में देशव्यापी मतदान की व्यवस्थाएँ विकसित की गईं। लगभग 17.32 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं वाले देश में यह बहुत बड़ी प्रशासनिक चुनौती थी।

6. प्रामाणिक मूल दस्तावेज

इतिहास संबंधी शोध या पुस्तक के लिए दो मूल स्रोत विशेष उपयोगी हैं।

शोध के लिए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी: कुछ प्रकाशित स्रोतों में 1951–52 के मतदान प्रतिशत, निर्दलीय सीटों और लोकसभा की कुल सदस्य संख्या को लेकर परस्पर विरोधी आँकड़े मिलते हैं। यहाँ प्रत्यक्ष चुनाव की 489 सीटें और निर्वाचन आयोग की दलवार तालिका को आधार बनाया गया है। मनोनीत प्रतिनिधियों को चुनाव में जीती गई सीटों में नहीं जोड़ना चाहिए।

इस चुनाव का ऐतिहासिक निष्कर्ष यह है कि कांग्रेस की जीत के साथ ही समाजवादी, कम्युनिस्ट, जनसंघ, दलित प्रतिनिधित्व और विभिन्न क्षेत्रीय राजनीतिक धाराओं ने भी स्वतंत्र भारत की पहली लोकसभा में अपना स्थान बनाया। यही धाराएँ आगे चलकर भारतीय राजनीति के कई बड़े परिवर्तनों का आधार बनीं।

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स्रोत

निर्वाचन आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टें · संकलन और तालिका-सुधार की टिप्पणी