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OCN Research Desk · भारतीय संसदीय लोकतंत्र

भारत का चौदहवाँ लोकसभा चुनाव 2004 : एनडीए की पराजय, कांग्रेस की वापसी और मनमोहन सिंह सरकार का गठन

राज्यवार सीटें, दलवार नतीजे और मत प्रतिशत, प्रमुख नेता तथा चुनावी घटनाक्रम

ओमकार चौधरी / OCN Research Deskस्वतंत्र शोध अध्याय · 27 अक्टूबर 2026
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भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — चौदहवाँ अध्याय

भारत का चौदहवाँ लोकसभा आम चुनाव 20 अप्रैल से 10 मई 2004 के बीच चार चरणों में हुआ। इस चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सत्ता से बाहर हो गया और कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार बनी।

भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने लगभग पाँच वर्ष शासन किया था। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए ने समय से पहले चुनाव कराने का निर्णय लिया। चुनाव प्रचार में आर्थिक विकास, राष्ट्रीय राजमार्ग, दूरसंचार, बुनियादी ढाँचे और ‘इंडिया शाइनिंग’ अभियान की प्रमुख भूमिका थी।

दूसरी ओर कांग्रेस ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा। उसने रोजगार, किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति से जुड़े मुद्दे उठाए।

चुनाव में कांग्रेस ने 145 और भाजपा ने 138 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 26.53 प्रतिशत और भाजपा को 22.16 प्रतिशत राष्ट्रीय मत मिले। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन उसके पास अपने दम पर बहुमत नहीं था।

यूपीए ने वामपंथी दलों और अन्य सहयोगियों के समर्थन से सरकार बनाई। 22 मई 2004 को डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

निर्वाचित लोकसभा सीटें
543
कांग्रेस की सीटें
145
भाजपा की सीटें
138
मतदान प्रतिशत
58.07%

1. चौदहवें लोकसभा चुनाव के महत्वपूर्ण आँकड़े

चुनाव संबंधी विषयविवरण
लोकसभाचौदहवीं
मतदान20 अप्रैल–10 मई 2004
मतदान के चरण4
मतगणना13 मई 2004
कुल निर्वाचित सीटें543
बहुमत के लिए272
सामान्य सीटें423
अनुसूचित जाति आरक्षित79
अनुसूचित जनजाति आरक्षित41
पंजीकृत मतदाता67,14,87,930
मतदान करने वाले38,99,48,330
मतदान प्रतिशत58.07%
वैध मत38,97,79,784
कांग्रेस की सीटें145
भाजपा की सीटें138
माकपा की सीटें43
समाजवादी पार्टी की सीटें36
राष्ट्रीय जनता दल की सीटें24
बहुजन समाज पार्टी की सीटें19
निर्वाचित महिला सांसद45
प्रधानमंत्री (चुनाव से पहले)अटल बिहारी वाजपेयी
प्रधानमंत्री (चुनाव के बाद)डॉ. मनमोहन सिंह
मुख्य निर्वाचन आयुक्तटी. एस. कृष्णमूर्ति

2. 2004 में समय से पहले चुनाव क्यों हुए?

तेरहवीं लोकसभा अक्टूबर 1999 में गठित हुई थी और उसका सामान्य कार्यकाल अक्टूबर 2004 तक चल सकता था। लेकिन एनडीए सरकार ने फरवरी 2004 में लोकसभा भंग करने की सिफारिश की।

इस निर्णय की राजनीतिक पृष्ठभूमि में कई घटनाएँ थीं।

  • 1999 के कारगिल युद्ध के बाद वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए ने स्थिर गठबंधन सरकार बनाई थी।
  • पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों और प्रतिबंधों से जुड़ी परिस्थितियों में परिवर्तन आया।
  • स्वर्णिम चतुर्भुज और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ, दूरसंचार विस्तार तथा आर्थिक सुधार सरकार की उपलब्धियों के रूप में प्रचारित किए गए।
  • 2003 के अंत में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने सरकारें बनाईं।
  • ‘इंडिया शाइनिंग’ प्रचार अभियान में भारत की आर्थिक वृद्धि और विकास पर जोर दिया गया।

हालाँकि चुनाव में मतदाताओं की प्राथमिकताएँ अलग-अलग राज्यों में भिन्न रहीं। इसलिए परिणाम को केवल एक प्रचार अभियान की सफलता या विफलता से समझना पर्याप्त नहीं है।

3. कौन-कौन से राजनीतिक दल मैदान में थे और उनके प्रमुख नेता कौन थे?

राजनीतिक दलप्रमुख नेता
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेससोनिया गांधी, डॉ. मनमोहन सिंह
भारतीय जनता पार्टीअटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टीहरकिशन सिंह सुरजीत, ज्योति बसु, प्रकाश करात
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टीए. बी. बर्धन, गुरुदास दासगुप्ता
समाजवादी पार्टीमुलायम सिंह यादव, अमर सिंह
बहुजन समाज पार्टीमायावती, कांशीराम
राष्ट्रीय जनता दललालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टीशरद पवार
डीएमकेएम. करुणानिधि
अन्नाद्रमुकजे. जयललिता
तेलुगु देशम पार्टीएन. चंद्रबाबू नायडू
तेलंगाना राष्ट्र समितिके. चंद्रशेखर राव
शिवसेनाबाल ठाकरे, उद्धव ठाकरे
बीजू जनता दलनवीन पटनायक
जनता दल (यूनाइटेड)जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार, शरद यादव
लोक जनशक्ति पार्टीरामविलास पासवान
झारखंड मुक्ति मोर्चाशिबू सोरेन
तृणमूल कांग्रेसममता बनर्जी
शिरोमणि अकाली दलप्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल
पट्टाली मक्कल कच्चीडॉ. एस. रामदास
मरुमलार्ची डीएमकेवाइको
राष्ट्रीय लोकदलअजित सिंह
असम गण परिषदप्रफुल्ल कुमार महंत
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंसफारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टीमुफ्ती मोहम्मद सईद, महबूबा मुफ्ती
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीगई. अहमद
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीनअसदुद्दीन ओवैसी

सभी व्यक्ति उस समय दलों के औपचारिक अध्यक्ष नहीं थे। इस सूची में प्रमुख संगठनात्मक, संसदीय और चुनावी नेताओं को भी सम्मिलित किया गया है।

विशेष तथ्य: 2004 में तेलंगाना राष्ट्र समिति का यही नाम था। बाद में इसका नाम भारत राष्ट्र समिति हुआ। ऐतिहासिक चुनावी विवरण में 2004 का मूल नाम इस्तेमाल करना उचित है।

4. किस राजनीतिक दल को कितनी सीटें और कितना वोट प्रतिशत मिला?

निर्वाचन आयोग के आधिकारिक परिणामों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी। वामपंथी दलों को भी उल्लेखनीय सफलता मिली। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने 43 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने दस सीटें जीतीं।

राजनीतिक दलसीटेंराष्ट्रीय वोट शेयर
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस14526.53%
भारतीय जनता पार्टी13822.16%
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी435.66%
समाजवादी पार्टी36लगभग 4.3%
राष्ट्रीय जनता दल24लगभग 2.5%
बहुजन समाज पार्टी195.33%
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम161.81%
शिवसेना12लगभग 1.8%
बीजू जनता दल111.30%
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी101.41%
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी91.80%
शिरोमणि अकाली दल8लगभग 0.9%
जनता दल (यूनाइटेड)8लगभग 2.4%
पट्टाली मक्कल कच्ची6लगभग 0.6%
तेलुगु देशम पार्टी5लगभग 3.0%
तेलंगाना राष्ट्र समिति5लगभग 0.6%
झारखंड मुक्ति मोर्चा5लगभग 0.5%
लोक जनशक्ति पार्टी4लगभग 0.7%
मरुमलार्ची डीएमके4लगभग 0.4%
राष्ट्रीय लोकदल3लगभग 0.5%
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी3लगभग 0.4%
फॉरवर्ड ब्लॉक30.35%
जनता दल (सेक्युलर)3लगभग 0.5%
तृणमूल कांग्रेस22.07%
असम गण परिषद20.53%
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस2लगभग 0.2%
निर्दलीय उम्मीदवार5लगभग 4.25%
अन्य विजयी दल12—

जहाँ ‘लगभग’ लिखा गया है, वहाँ प्रतिशत एक दशमलव तक पूर्णांकित है। तालिका में छोटी एक-सीट वाली पार्टियों को शामिल नहीं किया गया है। स्रोत: निर्वाचन आयोग की अंतिम दलवार रिपोर्ट और चुनाव परिणाम अभिलेख।

चुनाव के चार उल्लेखनीय निष्कर्ष

पहला, कांग्रेस को भाजपा से 4.37 प्रतिशत अंक अधिक वोट और सात अतिरिक्त सीटें मिलीं।

दूसरा, माकपा ने 43 सीटें जीतकर अपनी संसदीय स्थिति मजबूत की। भाकपा की दस सीटें मिलाने पर दोनों प्रमुख कम्युनिस्ट दलों की 53 सीटें थीं। अन्य वाम दल जोड़ने पर वामपंथी दलों की संख्या और बढ़ गई।

तीसरा, समाजवादी पार्टी 36 सांसदों के साथ लोकसभा की चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनी। बसपा को 19 सीटें मिलीं। उत्तर प्रदेश में इन दोनों दलों का प्रदर्शन भाजपा और कांग्रेस से आगे रहा।

चौथा, तेलुगु देशम की सीटें 1999 की 29 से घटकर पाँच रह गईं। दूसरी ओर कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश में 29 सीटें हासिल कीं।

5. राज्यवार लोकसभा सीटें : कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों का प्रदर्शन

2004 तक छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड अलग राज्य बन चुके थे। इसलिए 1999 की तुलना में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश की लोकसभा सीटों की संख्या घट गई थी।

इस चुनाव में उत्तर प्रदेश में 80, बिहार में 40, मध्य प्रदेश में 29, छत्तीसगढ़ में 11, झारखंड में 14 और उत्तराखंड में पाँच सीटें थीं।

राज्य / केंद्रशासित प्रदेशकुल सीटेंकांग्रेसभाजपाअन्य
उत्तर प्रदेश8091061
महाराष्ट्र48131322
आंध्र प्रदेश (अविभाजित)4229013
पश्चिम बंगाल426036
बिहार403532
तमिलनाडु3910029
मध्य प्रदेश294250
कर्नाटक288182
गुजरात2612140
राजस्थान254210
ओडिशा212712
केरल200020
असम14923
झारखंड14617
पंजाब13238
छत्तीसगढ़111100
हरियाणा10910
दिल्ली7610
जम्मू-कश्मीर6204
उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तरांचल)5131
हिमाचल प्रदेश4310
अरुणाचल प्रदेश2020
गोवा2110
मणिपुर2101
मेघालय2101
त्रिपुरा2002
मिजोरम1001
नगालैंड1001
सिक्किम1001
अंडमान एवं निकोबार1100
चंडीगढ़1100
दादरा एवं नगर हवेली1001
दमन और दीव1100
लक्षद्वीप1001
पांडिचेरी (पुडुचेरी)1001
कुल543145138260

स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, 2004 सांख्यिकीय रिपोर्ट, राज्यवार दलवार सीटों की सूची, पृष्ठ 105–109।

6. प्रमुख राज्यों में सभी महत्वपूर्ण दलों को कितनी सीटें मिलीं?

राज्यदलवार चुनाव परिणाम
उत्तर प्रदेशसपा 35, बसपा 19, भाजपा 10, कांग्रेस 9, रालोद 3, जदयू 1, नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी 1, समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) 1, निर्दलीय 1
बिहारराजद 22, जदयू 6, भाजपा 5, लोक जनशक्ति पार्टी 4, कांग्रेस 3
महाराष्ट्रकांग्रेस 13, भाजपा 13, शिवसेना 12, एनसीपी 9, रिपब्लिकन पार्टी (आठवले) 1
आंध्र प्रदेशकांग्रेस 29, तेलुगु देशम 5, तेलंगाना राष्ट्र समिति 5, भाकपा 1, माकपा 1, एमआईएम 1
पश्चिम बंगालमाकपा 26, कांग्रेस 6, भाकपा 3, आरएसपी 3, फॉरवर्ड ब्लॉक 3, तृणमूल कांग्रेस 1
तमिलनाडुडीएमके 16, कांग्रेस 10, पीएमके 5, एमडीएमके 4, भाकपा 2, माकपा 2
मध्य प्रदेशभाजपा 25, कांग्रेस 4
कर्नाटकभाजपा 18, कांग्रेस 8, जद (सेक्युलर) 2
गुजरातभाजपा 14, कांग्रेस 12
राजस्थानभाजपा 21, कांग्रेस 4
ओडिशाबीजद 11, भाजपा 7, कांग्रेस 2, झामुमो 1
केरलमाकपा 12, भाकपा 3, मुस्लिम लीग 1, केरल कांग्रेस 1, जद (सेक्युलर) 1, इंडियन फेडरल डेमोक्रेटिक पार्टी 1, निर्दलीय 1
झारखंडकांग्रेस 6, झामुमो 4, राजद 2, भाजपा 1, भाकपा 1
पंजाबअकाली दल 8, भाजपा 3, कांग्रेस 2
छत्तीसगढ़भाजपा 10, कांग्रेस 1
हरियाणाकांग्रेस 9, भाजपा 1
दिल्लीकांग्रेस 6, भाजपा 1

2004 के चार बड़े क्षेत्रीय परिणाम

तमिलनाडु: कांग्रेस, डीएमके और उनके सहयोगियों ने राज्य की सभी 39 लोकसभा सीटें जीतीं। अन्नाद्रमुक और भाजपा गठबंधन को कोई सीट नहीं मिली।

आंध्र प्रदेश: कांग्रेस को 29 सीटें मिलीं। सहयोगी तेलंगाना राष्ट्र समिति ने पाँच सीटें जीतीं। तेलुगु देशम पाँच सीटों पर सिमट गई। इसी समय के विधानसभा चुनाव में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार पराजित हुई और वाई. एस. राजशेखर रेड्डी मुख्यमंत्री बने।

उत्तर प्रदेश: सपा और बसपा ने मिलकर 54 सीटें जीतीं। कांग्रेस को नौ और भाजपा को दस सीटें मिलीं। सपा राज्य की सबसे बड़ी लोकसभा पार्टी बनी।

केरल: कांग्रेस स्वयं एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी। वाम लोकतांत्रिक मोर्चे से जुड़े दलों ने व्यापक सफलता हासिल की। कांग्रेस के लिए राज्य के परिणाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण थे क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर उसके नेतृत्व में सरकार बनी, लेकिन केरल से उसका कोई निर्वाचित सांसद नहीं था।

7. चौदहवें लोकसभा चुनाव की प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ

1. वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की पराजय

भाजपा ने आर्थिक वृद्धि, बुनियादी ढाँचे और राष्ट्रीय उपलब्धियों को अपने चुनाव प्रचार में प्रमुखता दी। ‘इंडिया शाइनिंग’ अभियान व्यापक रूप से चर्चा में रहा।

भाजपा की सीटें 1999 की 182 से घटकर 138 रह गईं। सरकार के कई सहयोगी दलों को भी सीटों का नुकसान हुआ।

2. सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सत्ता में वापसी

सोनिया गांधी ने उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट से चुनाव जीता। इससे पहले 1999 में वह अमेठी से निर्वाचित हुई थीं।

चुनाव के बाद उन्हें कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया। प्रधानमंत्री पद को लेकर चर्चा के बीच उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री न बनने का निर्णय लिया और डॉ. मनमोहन सिंह का नाम प्रस्तावित किया।

3. डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने

22 मई 2004 को राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई।

मनमोहन सिंह उस समय राज्यसभा सदस्य थे। वे भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री बने।

4. वामपंथी दलों की सरकार गठन में भूमिका

माकपा को 43, भाकपा को दस, आरएसपी को तीन और फॉरवर्ड ब्लॉक को तीन सीटें मिलीं। इन चार दलों की संयुक्त संख्या 59 थी।

वाम दलों ने यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दिया। वे सरकार में शामिल नहीं हुए, लेकिन न्यूनतम साझा कार्यक्रम और कई आर्थिक नीतियों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

5. आंध्र प्रदेश में सत्ता परिवर्तन

कांग्रेस ने लोकसभा की 29 सीटें जीतीं। विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सफलता हासिल की।

वाई. एस. राजशेखर रेड्डी मुख्यमंत्री बने और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।

8. कुछ महत्वपूर्ण नेताओं के चुनाव परिणाम

नेतानिर्वाचन क्षेत्रपरिणाम
अटल बिहारी वाजपेयीलखनऊभाजपा से विजयी
सोनिया गांधीरायबरेलीकांग्रेस से विजयी
राहुल गांधीअमेठीकांग्रेस से पहली बार विजयी
लालकृष्ण आडवाणीगांधीनगरभाजपा से विजयी
मुलायम सिंह यादवमैनपुरीसपा से विजयी
मायावतीअकबरपुरबसपा से विजयी
लालू प्रसाद यादवछपरा और मधेपुरादोनों सीटों से विजयी
शरद पवारबारामतीएनसीपी से विजयी
ममता बनर्जीकोलकाता दक्षिणतृणमूल से विजयी
असदुद्दीन ओवैसीहैदराबादएमआईएम से पहली बार विजयी

2004 के चुनाव से राहुल गांधी का संसदीय राजनीतिक जीवन आरंभ हुआ। उन्होंने अमेठी से चुनाव जीता। वहीं हैदराबाद से असदुद्दीन ओवैसी पहली बार लोकसभा पहुँचे।

9. यूपीए सरकार का गठन कैसे हुआ?

चुनाव के बाद कांग्रेस ने अपने चुनावी सहयोगियों के साथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनाई। राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति और कई दूसरे दल इस राजनीतिक व्यवस्था में शामिल थे।

यह चयनित दलों की सीटों का विवरण है, संपूर्ण यूपीए गठबंधन का योग नहीं। माकपा और भाकपा सरकार में शामिल नहीं थीं।

कांग्रेस के 145 सांसद थे, इसलिए सरकार चलाने के लिए सहयोगी दलों और बाहरी समर्थन की आवश्यकता थी। वामपंथी दलों ने सरकार को संसदीय समर्थन दिया, जबकि कई क्षेत्रीय दलों ने मंत्रिमंडल में भाग लिया।

10. 1999 और 2004 के चुनावों की तुलना

राजनीतिक दल19992004
कांग्रेस114145
भाजपा182138
माकपा3343
भाकपा410
समाजवादी पार्टी2636
बसपा1419
राजद724
डीएमके1216
तेलुगु देशम295
शिवसेना1512
बीजद1011
तृणमूल कांग्रेस82
एनसीपी89

वोट शेयर में क्या परिवर्तन हुआ?

दल19992004
कांग्रेस28.30%26.53%
भाजपा23.75%22.16%
माकपा5.40%5.66%
बसपा4.16%5.33%
सपा3.76%लगभग 4.32%

यहाँ एक रोचक तथ्य है। कांग्रेस का राष्ट्रीय वोट शेयर 1999 की तुलना में 2004 में घटा, लेकिन उसकी सीटें 114 से बढ़कर 145 हो गईं। इसके विपरीत भाजपा का वोट प्रतिशत और सीटें दोनों घटे।

11. चौदहवीं लोकसभा के कार्यकाल की प्रमुख घटनाएँ (2004–2009)

वर्षप्रमुख घटना
2004मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए सरकार का गठन
2005सूचना का अधिकार अधिनियम पारित
2005राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पारित
2005भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग पर समझ की शुरुआत
2006अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में आरक्षण विस्तार संबंधी कानून
2007प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं
2008भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को लेकर वाम दलों ने सरकार से समर्थन वापस लिया
22 जुलाई 2008मनमोहन सिंह सरकार ने लोकसभा में विश्वास मत जीता
26 नवंबर 2008मुंबई में आतंकवादी हमले हुए
2009पंद्रहवाँ लोकसभा चुनाव संपन्न हुआ

जुलाई 2008 का विश्वास मत

भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को लेकर वाम दलों ने मनमोहन सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया।

22 जुलाई 2008 को लोकसभा में विश्वास मत हुआ।

सरकार के पक्ष में

275

सरकार के विरोध में

256

समाजवादी पार्टी ने परमाणु समझौते के मुद्दे पर सरकार को समर्थन दिया। इसके चलते यूपीए सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर सकी।

12. पहले चौदह लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और जनसंघ/भाजपा का प्रदर्शन

चुनाव वर्षकांग्रेस की सीटेंजनसंघ / भाजपा की सीटें
1951–523643
19573714
196236114
196728335
197135222
1977154जनसंघ जनता पार्टी में समाहित
1980353भाजपा का गठन चुनाव के बाद
1984–854142
198919785
1991–92244120
1996140161
1998141182
1999114182
2004145138

13. मूल आधिकारिक स्रोत

इस अध्ययन के लिए प्राथमिक स्रोत भारत निर्वाचन आयोग की 2004 की अंतिम सांख्यिकीय रिपोर्ट है।

भारत निर्वाचन आयोग — 2004 लोकसभा चुनाव, संपूर्ण सांख्यिकीय रिपोर्ट, खंड I

निर्वाचन आयोग — सभी लोकसभा चुनावों की मूल रिपोर्टें

अंतर-संसदीय संघ — 2004 चुनाव और सरकार गठन का ऐतिहासिक विवरण

निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट में पृष्ठ 99–109 पर सीट जीतने वाले दलों और उनके राज्यवार परिणाम तथा पृष्ठ 110 से आगे राष्ट्रीय मत प्रतिशत उपलब्ध हैं।

14. चौदहवें लोकसभा चुनाव का ऐतिहासिक महत्व

2004 के चुनाव ने गठबंधन आधारित भारतीय राजनीति में एक और सत्ता परिवर्तन दर्ज किया। भाजपा 138 और कांग्रेस 145 सीटें लेकर आईं। दोनों में से किसी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला, लेकिन चुनाव के बाद कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संसदीय समर्थन जुटाया।

इस चुनाव के तीन महत्वपूर्ण परिणाम थे। पहला, एनडीए की लगभग पाँच वर्षीय सरकार के बाद केंद्र में सत्ता परिवर्तन हुआ। दूसरा, क्षेत्रीय दलों और वामपंथी दलों का समर्थन नई सरकार के गठन में महत्वपूर्ण बना। तीसरा, मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए ने पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया।

2004 का केंद्रीय ऐतिहासिक तथ्य यह है कि कांग्रेस केवल 145 सीटें जीतकर केंद्र में सरकार बनाने में सफल रही, जबकि 138 सीटों वाली भाजपा विपक्ष में बैठी। यह बहुदलीय संसदीय प्रणाली में गठबंधन और सदन के बहुमत के महत्व का स्पष्ट उदाहरण था।

2009 के पंद्रहवें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटें 145 से बढ़कर 206 हुईं और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए ने दूसरी बार सरकार बनाई।

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स्रोत

निर्वाचन आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टें · संकलन और तालिका-सुधार की टिप्पणी